फीस बढ़ोतरी के पीछे कारण
प्लेटफॉर्म फीस में यह बदलाव ऐसे समय पर हुआ है जब एलपीजी की प्लेटफॉर्म में पहुंचा हुआ है, जिससे रेस्टोरेंट और फूड डिलीवरी कंपनियों की लागत बढ़ेगी है। जोमैटो ने यह कदम यूनिट इकोनॉमिक्स और मार्जिन सुधार के उद्देश्य से उठाया है, ताकि बढ़ती परिचालन लागतों के बीच संचालन को स्थिर रखा जा सके।
फीस बढ़ोतरी का इतिहास
जोमैटो ने प्लेटफॉर्म फीस में आखिरी बार सितंबर 2025 में बदलाव किया था। इससे पहले, फरवरी 2025 में त्योहारी सीजन के दौरान यह फीस 6 रुपये प्रति ऑर्डर से बढ़कर 10 रुपये कर दिया गया था। अगस्त 2023 में कंपनी ने प्रति ऑर्डर 2 रुपये का प्लेटफॉर्म फीस लागू किया था, जिसे बाद में प्रमुख बाजारों में धीरे-धीरे बढ़ाया गया।
प्रतिस्पर्धी कंपनियों की तुलना
प्रतिद्वंद्वी कंपनी स्विगी वर्तमान में कर सहित 14.99 रुपए प्रति ऑर्डर प्लेटफॉर्म फीस ले रही है। इसका मतलब है कि जोमैटो और स्विगी की प्लेटफॉर्म फीस अब लगभग बराबर हो गई है।
शेयर बाजार में असर
जोमैटो की पेरेंट कंपनी इटरनल के शेयर शुक्रवार को 1.55 प्रतिशत यानी 3.55 रुपए की तेजी के साथ 232.29 रुपए पर बंद हुए। दिन के दौरान शेयर ने 236.70 रुपए का सर्वोच्च स्तर और 230.10 रुपए का न्यूनतम स्तर जारी किया।
वित्तीय प्रदर्शन
दिसंबर तिमाही के बढ़ोतरी में कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रेशर इंडेक्स आधार पर 72.88 प्रतिशत बढ़कर 102 करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले साल समान अवधि में 59 करोड़ रुपए था। इसी दौरान कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू करीब तीन गुना बढ़कर 16,315 करोड़ रुपए हो गया, जो कि एक साल पहले समान अवधि में 5,405 करोड़ रुपए था।
ब्रांडिंग और भविष्य की योजना
मार्च 2025 में जोमैटो ने अपने आपको इटरनल के नाम से रीब्रांड किया था। प्लेटफॉर्म फीस में यह बढ़ोतरी कंपनी की लॉन्ग-टर्म बढ़ोतरी और स्टेबिलिटी सुनिश्चित करने की स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। बढ़ती ऑपरेटिंग कॉस्ट और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए, फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म भविष्य में भी अपनी प्राइस स्ट्रक्चर और फीस मॉडल में बदलाव कर सकते हैं।
