रिकॉर्ड बढ़ोतरी: एक साल में 52 गीगावाट से ज्यादा की छलांग
वित्त वर्ष 2025-26 (31 जनवरी 2026 तक) के दौरान देश की ऊर्जा क्षमता में 52.53 गीगावाट की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई, जो अब तक किसी एक वर्ष में सबसे ज्यादा है। इस बढ़ोतरी में अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) का सबसे बड़ा योगदान रहा। कुल बढ़ोतरी में 39.65 गीगावाट हिस्सा रिन्यूएबल सेक्टर से आया, जिसमें सोलर ऊर्जा ने 34.95 गीगावाट और पवन ऊर्जा ने 4.61 गीगावाट का योगदान दिया।
इससे पहले 2024-25 में 34.05 गीगावाट की वृद्धि दर्ज की गई थी, यानी इस साल की रफ्तार कहीं ज्यादा तेज रही। यह साफ दर्शाता है कि भारत अब पारंपरिक ऊर्जा के साथ-साथ हरित ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
ग्लोबल मंच पर भारत: भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026
ऊर्जा क्षेत्र में इन उपलब्धियों को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने के लिए Bharat Electricity Summit 2026 का आयोजन नई दिल्ली के Yashobhoomi Convention Centre में 19 से 22 मार्च के बीच किया जा रहा है। यह सम्मेलन पावर और इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर से जुड़े वैश्विक विशेषज्ञों, कंपनियों और नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाता है।
सिर्फ उत्पादन नहीं, ट्रांसमिशन नेटवर्क भी हुआ मजबूत
सरकार ने केवल बिजली उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को भी मजबूत करने पर जोर दिया है। नए सबस्टेशन, अत्याधुनिक ट्रांसफार्मर और हाई-कैपेसिटी ट्रांसमिशन कॉरिडोर विकसित किए गए हैं, जिससे बिजली को उत्पादन केंद्र से उपभोक्ताओं तक तेजी और दक्षता से पहुंचाया जा सके।
भारत का नेशनल पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क अब 5 लाख सर्किट किलोमीटर (CKM) से ज्यादा का हो चुका है, जबकि ट्रांसफॉरमेशन क्षमता 1,407 गीगावोल्ट एम्पीयर (GVA) तक पहुंच गई है। इससे ग्रिड की स्थिरता बढ़ी है और अलग-अलग ऊर्जा स्रोतों का बेहतर एकीकरण संभव हुआ है।
भविष्य के लिए मजबूत नींव
ऊर्जा क्षेत्र में यह प्रगति सिर्फ वर्तमान जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की मांग को ध्यान में रखकर की गई है। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, उद्योगों के विस्तार और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के बढ़ते चलन को देखते हुए यह क्षमता देश को लंबे समय तक ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करेगी।
