QR कोड ID से होगी विक्रेताओं की पहचान
रेलवे ने ट्रेनों में काम करने वाले हर अधिकृत विक्रेता, सहायक और कर्मचारियों के लिए QR कोड वाले ID कार्ड अनिवार्य कर दिए हैं। इससे यात्रियों और अधिकारियों को तुरंत यह पता चल जाएगा कि कौन विक्रेता अधिकृत है और कौन नहीं। यह कदम सामानों पर फर्जी विक्रेताओं की समस्या को खत्म करने के लिए उठाया गया है।
डिजिटल ट्रैकिंग से सुधरेगी खाने की क्वालिटी
अब रेलवे द्वारा परोसे जाने वाले फूड पैकेट्स को भी डिजिटल तरीके से ट्रैक किया जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि खाना कहां तैयार हुआ, कैसे पहुंचाया और उसकी क्वालिटी कैसी है। इससे विक्रेताओं और यात्रियों को सुरक्षित भोजन मिलेगा।
बेस किचन में आधुनिक सुविधाएं और निगरानी
खाने की क्वालिटी सुधारने के लिए रेलवे ने कई अहम कदम उठाए हैं
आधुनिक बेस किचन की स्थापना
CCTV कैमरों के ज़रिए निगरानी
ब्रांडेड और पिज्जा कच्चे माल का इस्तेमाल
खाद्य सुरक्षा पर्यवेक्षकों की सेवाएं
इन उपायों से खाना बनाने की पूरी प्रक्रिया पर नज़र रखी जा रही है।
FSSAI सर्टिफिकेशन और सख्त जांच
रेलवे ने सभी कैटरिंग यूनिट्स के लिए Food Safety and Standards Authority of India का प्रमाणन अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही नियमित रूप से फूड सैंपल की जांच की जाती है, ताकि क्वालिटी और स्वच्छता मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके।
थर्ड-पार्टी ऑडिट और सर्वे से निगरानी
पेंट्री कार और बेस किचन की सफाई और क्वालिटी जांच के लिए थर्ड-पार्टी ऑडिट संचालित किया जा रहा है। इसके अलावा यात्रियों से फायदा लेने के लिए ग्राहक संतुष्टि सर्वे भी किए जा रहे हैं, जिससे सेवाओं में लगातार सुधार किया जा सके।
कर्मचारियों को मिल रहा ट्रेनिंग
बेहतर ग्राहक सेवा सुनिश्चित करने के लिए इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन द्वारा निर्देशिका कर्मचारियों को नियमित ट्रेनिंग दी जा रही है। इससे उनके कौशल में सुधार हो रहा है और यात्रियों को बेहतर अनुभव मिल रहा है।
यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?
इन सभी पैदल चलने वालों के बाद ट्रेन में मिलने वाला खाना अब ज्यादा सुरक्षित, स्वच्छ और भरोसेमंद होगा। साथ ही फर्जी वेंडर्स की समस्या भी काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है।
