जितिन प्रसाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इन बैठकों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पोलैंड की अग्रणी कंपनियों के प्रमुखों के साथ निवेश और तकनीकी सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया। रक्षा एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी डब्ल्यूबी ग्रुप के दौरे के दौरान उन्होंने कंपनी के अध्यक्ष पिओटर वोज्चेखोव्स्की से मुलाकात की। इस बैठक में अगली पीढ़ी की रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स तकनीक और मानवरहित हवाई प्रणालियों यानी यूएवी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। इसके अलावा उन्नत संचार तकनीक स्वायत्त प्रणालियों और सामरिक इलेक्ट्रॉनिक्स में साझेदारी की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।
सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में भी भारत-पोलैंड सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। मंत्री ने वैश्विक आईटी और क्लाउड सेवा कंपनी बिलेनियम के सीईओ गावेल लोपिंस्की से मुलाकात की। इस कंपनी की भारत के पुणे में पहले से मौजूदगी है। बैठक में भारत के डिजिटल टैलेंट इकोसिस्टम और क्लाउड ट्रांसफॉर्मेशन पर चर्चा हुई। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई और आईटी क्षेत्र में नए निवेश के अवसरों को लेकर भी विचार साझा किए गए। भारत में उपलब्ध कुशल तकनीकी प्रतिभाओं और तेजी से बढ़ते डिजिटल बाजार को पोलिश कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए जितिन प्रसाद ने क्रियोटेक इंस्ट्रूमेंट्स के सह-संस्थापक डॉ. ग्रेजेगोरज ब्रॉना और उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी ग्रेजेगोर्ज व्रोचना से मुलाकात की। बातचीत में माइक्रो सैटेलाइट्स अंतरिक्ष हार्डवेयर और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में संयुक्त काम करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। क्वांटम तकनीक और अंतरिक्ष अनुसंधान में निवेश के अवसर भी बैठक का हिस्सा रहे। भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और ऐसे में पोलैंड की तकनीकी कंपनियों के साथ साझेदारी नए शोध और औद्योगिक विकास के अवसर पैदा कर सकती है।
इसके अलावा मंत्री ने बोरिस्जेव ग्रुप के बोर्ड सदस्य एडम होलेवा और मैफ्लो तथा बीएपी ग्रुप के प्रमुखों से भारतीय दूतावास में मुलाकात की। इन बैठकों में तकनीकी सहयोग संयुक्त उद्यम और निवेश के नए अवसरों पर चर्चा हुई। जितिन प्रसाद ने बताया कि बातचीत के दौरान भारत सरकार की मेक इन इंडिया पहल और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन यानी पीएलआई योजनाओं के तहत निवेश की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया।
इन बैठकों को भारत और पोलैंड के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। रक्षा से लेकर अंतरिक्ष और डिजिटल तकनीक तक सहयोग बढ़ने से दोनों देशों की कंपनियों को नए अवसर मिल सकते हैं। साथ ही संयुक्त निवेश और अनुसंधान के जरिए वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बनाने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि इन चर्चाओं के बाद किसी निवेश समझौते या परियोजना की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
