राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के बाद संगठन की आगामी रणनीति के लिहाज से इस बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें विजयादशमी 2025 से विजयादशमी 2026 तक देशभर में आयोजित शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। साथ ही यह भी विचार किया गया कि समाज के अलग-अलग वर्गों तक संघ की पहुंच किस तरह बढ़ाई जाए और अब तक शुरू की गई गतिविधियों को आगे किस तरह प्रभावी बनाया जाए। संघ के पदाधिकारियों ने शताब्दी वर्ष के दौरान हुए आयोजनों के अनुभवों और उनके परिणामों पर भी चर्चा की।
बैठक का एक प्रमुख विषय पंच परिवर्तन रहा। संघ की ओर से सामाजिक जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए निर्धारित इन पांच विषयों को आम लोगों के दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया। संगठन का प्रयास है कि पंच परिवर्तन केवल सभाओं और कार्यक्रमों तक सीमित न रहें बल्कि समाज के सामान्य जीवन में भी दिखाई दें। इसके लिए शताब्दी वर्ष में हुए कार्यों की समीक्षा के साथ आगे की कार्ययोजना पर विचार किया गया।
देशभर में शाखाओं के विस्तार और संगठन को मजबूत बनाने का मुद्दा भी बैठक के एजेंडे में शामिल रहा। शताब्दी वर्ष के दौरान स्वयंसेवकों ने नए स्थानों पर शाखाएं शुरू करने के लिए काम किया है। अब इन शाखाओं को नियमित और अधिक प्रभावी बनाने के साथ नए क्षेत्रों में संगठन की गतिविधियां बढ़ाने पर चर्चा हुई। बैठक में संघ के सभी 11 क्षेत्रों और 46 प्रांतों के प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें क्षेत्र संघचालक क्षेत्र कार्यवाह क्षेत्र प्रचारक प्रांत संघचालक और प्रांत प्रचारक सहित विभिन्न जिम्मेदारियों से जुड़े कार्यकर्ता शामिल हुए।
नई पीढ़ी से जुड़े विषयों पर भी संघ नेतृत्व ने विशेष ध्यान दिया। युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और Gen-Z की बदलती सोच तथा प्राथमिकताओं को समझने पर चर्चा की गई। इसके साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में विद्या भारती की भूमिका को और प्रभावी बनाने के विषय पर भी विचार हुआ। विदेशों में संघ के कार्यों का विस्तार और वहां संगठनात्मक गतिविधियों को मजबूत करने की संभावनाओं पर भी मंथन किया गया।
बैठक में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की ओर से तीन ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के जीवन और योगदान से जुड़े वक्तव्यों का विषय भी महत्वपूर्ण रहा। इनमें राजनारायण बोस की 200वीं जयंती स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान के 100वें वर्ष और स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के जन्म के 100वें वर्ष से जुड़े प्रसंग शामिल हैं। इन व्यक्तित्वों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।
बैठक स्थल पर संघ की 100 वर्षों की यात्रा और मालवा क्षेत्र में संगठन के विकास को दर्शाने वाली विशेष प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही। इसका उद्घाटन सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने 31 अक्टूबर को किया था। प्रदर्शनी में संघ की स्थापना से लेकर अब तक के सफर और संगठन के विस्तार को दर्शाया गया है। अब बैठक के समापन के साथ सभी की नजर इस बात पर है कि संघ नेतृत्व की ओर से भविष्य की संगठनात्मक गतिविधियों और सामाजिक अभियानों को लेकर क्या संदेश सामने आता है।
