बाजार की इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह आईटी सेक्टर में रिटर्न्स की खरीदारी है। निफ्टी आईटी करीब 4 फीसदी की तेजी के साथ टॉप जेनर बन गया है। इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और टेक महिंद्रा जैसी दिग्गज आईटी कंपनियां इनफॉरमेंस शॉपिंग को मिल रही हैं। इसकी एक बड़ी वैश्विक ग्लोबल ब्रोकरेज सीएलएसए की रिपोर्ट है, जिसमें कहा गया है कि ओपनएआई और एंथ्रोपिक के नए इंजीनियरिंग टूल्स से इंडस्ट्री को कोई बड़ा खतरा नहीं है। इस रिपोर्ट के बाद वोडाफोन की चिंता कम हुई और सेक्टर में तेजी से पैसा लौटा।
कच्चे तेल की गिरावट और ज्वालामुखी वोलैटिलिटी ने स्केल फ़्रॉम
बाज़ार की सूची में अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों का भी बहुत बड़ा योगदान है। कच्चे तेल की बिक्री में आई गिरावट से उपज की सेंटि बेहतर हुई है। WTI क्रूड ऑयल में करीब 3.43% की गिरावट दर्ज की गई और 92.91 डॉलर प्रति शेयर के आसपास रहा, जबकि ब्रेंट क्रूड भी 2.02% बढ़कर 101.3 डॉलर के करीब रहा। कच्चा तेल सस्ता होने से भारत जैसे औद्योगिक देश के लिए अर्थव्यवस्था और अर्थव्यवस्था पर दबाव कम होता है, जिससे शेयर बाजार को समर्थन मिलता है।
इसके अलावा भारत VIX में गिरावट के लिए भी बाजार सकारात्मक संकेत है। इंडिया विक्स 4.30% ग्रुप 18.94 पर आया है, जो बताता है कि बाजार में स्थिरता कम हो रही है और स्थिरता बढ़ रही है। आम तौर पर जब अस्थिरता कम होती है, तो निवेशक अधिकांश स्वामित्व के साथ बाजार में पैसा विकल्प होते हैं।
मिडकैप और स्मॉलकैप स्टूडियो में भी मजबूत तेजी से देखने को मिल रही है। मैथ्यू मिडकैप 100 स्टॉल 1.77% और मैडकैप 100 स्टॉल 1.52% तक चढ़े, जिससे यह पता चलता है कि रैली व्यापक है और केवल साइंटिस्ट स्टॉक तक सीमित नहीं है।
कुल मिलाकर, आईटी सेक्टर में विश्वास की वापसी, कच्चे तेल के क्षेत्र में गिरावट और कम होने वाली बाजार अस्थिरता ने मिलकर इस तेजी को जगह दी है। अगर यही ट्रेंड जारी हो रहा है, तो आने वाले दिनों में बाजार में नए व्यापारियों को चुना जा सकता है।
