शंकर मठ का निर्माण और स्थापना भी अपने आप में एक लंबी आध्यात्मिक यात्रा से जुड़ी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस मठ की नींव वर्ष 1960 से 1962 के बीच संत स्वामी महेशानंद गिरि महाराज ने रखी थी। इसके बाद वर्ष 1965 से यहां संतों और संन्यासियों का निवास शुरू हुआ। मंदिर परिसर के निर्माण की प्रक्रिया वर्ष 1975 में शुरू की गई। वर्तमान में मठ की देखरेख स्वामी पुण्यानंद गिरि महाराज के मार्गदर्शन में की जा रही है। अरावली की पहाड़ियों और हरियाली से घिरा होने के कारण यहां पहुंचने वाले लोगों को एक अलग तरह की शांति का अनुभव होता है।
इस मठ की सबसे बड़ी पहचान गर्भगृह में स्थापित विशाल शिवलिंग है। यह शिवलिंग करीब 9.5 फीट ऊंचा और 7.5 फीट चौड़ा बताया जाता है। इसका वजन लगभग 27 टन है। इसे काले संगमरमर के एक ही विशाल पत्थर को तराशकर तैयार किया गया है। इसकी बनावट को लेकर भी कई रोचक बातें बताई जाती हैं। मान्यता के अनुसार पत्थर को तराशते समय उस पर भगवान शिव की तीसरी आंख और जटाओं जैसी आकृतियां उभर आई थीं। यही वजह है कि श्रद्धालु इस शिवलिंग को बेहद विशेष मानते हैं।
मंदिर की एक और खास बात यहां होने वाला प्राकृतिक जलाभिषेक है। बारिश के मौसम में मंदिर की छत से पानी सीधे शिवलिंग पर गिरता है। श्रद्धालु इस दृश्य को बेहद पवित्र मानते हैं और इसे भगवान शिव का प्राकृतिक जलाभिषेक कहते हैं। मंदिर का निर्माण लाल पत्थरों से किया गया है और इसकी वास्तुकला इसे दूसरे शिव मंदिरों से अलग पहचान देती है। यहां पारंपरिक गुंबद की जगह शिवलिंग जैसी विशाल संरचना बनाई गई है।
मंदिर परिसर में कमल का सुंदर तालाब और रुद्राक्ष के पेड़ भी मौजूद हैं। इनकी वजह से पूरे परिसर का वातावरण बेहद शांत और आकर्षक दिखाई देता है। यहां रुकने वाले श्रद्धालुओं के लिए शंकर धाम नाम से ठहरने की व्यवस्था भी बताई गई है। मठ में प्रतिदिन सुबह और शाम वेदांत तथा उपनिषदों का पाठ किया जाता है। भगवान शिव की दिन में तीन बार आरती होती है जबकि सोमवार को विशेष भस्म आरती का आयोजन किया जाता है। इसमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
अगर आप माउंट आबू घूमने का कार्यक्रम बना रहे हैं तो शंकर मठ को अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं। हालांकि दर्शन के लिए जाने से पहले मंदिर के समय का ध्यान रखना जरूरी है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक मुख्य मंदिर के कपाट बंद रहते हैं। अपनी अनोखी वास्तुकला विशाल शिवलिंग और शांत आध्यात्मिक वातावरण के कारण शंकर मठ माउंट आबू के प्रमुख दर्शनीय धार्मिक स्थलों में शामिल है।
