सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने दलील दी कि जांच के दौरान गिरिबाला सिंह ने अपेक्षित सहयोग नहीं किया। यह आरोप भी लगाया गया कि साक्ष्यों को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी। सीबीआई और राज्य सरकार ने आशंका जताई कि यदि उन्हें जमानत मिलती है, तो मामले के गवाहों और साक्ष्यों पर असर पड़ सकता है। इसी आधार पर सरकारी पक्ष ने याचिका खारिज करने की मांग की।
सीबीआई की ओर से अदालत को बताया गया कि जांच के दौरान जब्त किए गए लैपटॉप, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य तकनीकी साक्ष्यों से संबंधित रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई हैं। सरकारी पक्ष के अनुसार, इन रिपोर्टों से जांच को आगे बढ़ाने और मामले से जुड़े तथ्यों का आकलन करने में मदद मिल सकती है। रिपोर्ट लंबित होने का मुद्दा भी जमानत का विरोध करते समय उठाया गया।
वहीं, गिरिबाला सिंह की ओर से पेश बचाव पक्ष ने जमानत दिए जाने की मांग की। उनके वकील ने दलील दी कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। बचाव पक्ष ने उनकी उम्र, बीमारियों और करीब पांच महीने से न्यायिक हिरासत में रहने का हवाला भी दिया। इसके अलावा यह तर्क रखा गया कि सीबीआई ने उनके खिलाफ दहेज अधिनियम की धाराओं में चालान पेश नहीं किया है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।
यह मामला भोपाल की पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की बहू और मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़ा है। ट्विशा ने 12 मई को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद पुलिस ने गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ दहेज हत्या तथा दहेज अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। घटना के बाद मामले की जांच और जमानत को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी।
गिरिबाला सिंह को 15 मई को भोपाल की जिला एवं सत्र अदालत से अग्रिम जमानत मिली थी। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। मामले में दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग भी उठी। इसके बाद हाईकोर्ट ने दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की टीम से दोबारा पोस्टमार्टम कराने के निर्देश दिए थे। 27 मई को हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत निरस्त कर दी थी। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी।
मामले में ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने सुनवाई मध्य प्रदेश से बाहर कराने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस याचिका में सीबीआई, गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को प्रतिवादी बनाया गया था। उपलब्ध विवरण के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर दो सप्ताह के भीतर सुनवाई करने के निर्देश दिए थे।
अब हाईकोर्ट के फैसले पर निगाहें टिकी हैं। जमानत के पक्ष में बचाव पक्ष ने स्वास्थ्य, उम्र और हिरासत की अवधि से जुड़े तर्क रखे हैं, जबकि सीबीआई और राज्य सरकार ने जांच की स्थिति तथा साक्ष्यों को प्रभावित किए जाने की आशंका के आधार पर विरोध किया है। अदालत का अंतिम आदेश आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि गिरिबाला सिंह को जमानत मिलती है या उन्हें न्यायिक हिरासत में रहना होगा।
