26 से 28 अक्टूबर तक कर सकती हैं खरीदारी
ज्योतिषविदों के अनुसार, इस साल पंचक 25 अक्टूबर को शाम करीब 7 बजकर 22 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। इसके बाद महिलाएं 26, 27 और 28 अक्टूबर को करवा चौथ की तैयारियों के लिए खरीदारी कर सकती हैं। सोमवार से ही त्योहार की तैयारी शुरू की जा सकती है।
इन दिनों महिलाएं पूजा के लिए करवा, पूजा की थाली, दीपक और छलनी खरीद सकती हैं। इसके अलावा चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी, साड़ी और अन्य सुहाग सामग्री भी अपनी जरूरत और पसंद के अनुसार ली जा सकती है।
क्या शुक्र अस्त होने पर सुहाग सामग्री खरीदना अशुभ है?
ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को प्रेम, सौंदर्य, विवाह और वैवाहिक सुख का कारक माना जाता है। शुक्र के अस्त होने की अवधि में विवाह जैसे कुछ मांगलिक कार्यों के मुहूर्त को लेकर सावधानी बरती जाती है। इसी वजह से करवा चौथ की खरीदारी को लेकर भी महिलाओं के मन में असमंजस है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, शुक्र अस्त होने का मतलब यह नहीं है कि करवा चौथ का व्रत नहीं रखा जा सकता या सुहाग का सामान खरीदना वर्जित है। महिलाएं चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, नई साड़ी और पूजा सामग्री खरीद सकती हैं। सोशल मीडिया पर खरीदारी को लेकर फैल रही भ्रामक जानकारियों के बीच जरूरी है कि व्रत और विवाह जैसे अलग-अलग धार्मिक आयोजनों के नियमों को एक जैसा न समझें।
29 अक्टूबर को शुक्र का उदय होने की जानकारी
द्रिक पंचांग के अनुसार, शुक्र 12 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 19 मिनट पर अस्त हुए थे। पंचांग में 29 अक्टूबर को शाम 6 बजे शुक्र के उदय होने का समय बताया गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शुक्र के उदय होने के बाद कुछ शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय माना जाता है।
हालांकि, विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के मुहूर्त की शुरुआत को लेकर अलग-अलग पंचांगों और स्थानीय परंपराओं में अंतर हो सकता है। इसलिए विवाह की तारीख तय करने से पहले संबंधित पंचांग या योग्य ज्योतिषाचार्य से जानकारी लेना उचित रहेगा।
करवा चौथ की पूजा के लिए पहले जुटा लें ये सामग्री
करवा चौथ के दिन पूजा के समय किसी जरूरी वस्तु की कमी न हो, इसके लिए सामग्री पहले से खरीदकर रख लेना सुविधाजनक रहता है। पूजा के लिए करवा, छलनी, पूजा की थाली, दीपक, रोली, अक्षत, कलावा, फल और मिठाई जैसी चीजें जुटा लें।
इसके साथ ही महिलाएं अपनी पसंद के अनुसार चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, साड़ी या सूट भी खरीद सकती हैं। समय रहते तैयारी करने से व्रत के दिन की भागदौड़ कम होगी और पूजा की व्यवस्था आसानी से की जा सकेगी।
