नई दिल्ली ।भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि लगातार चुनावी हार के कारण कांग्रेस अब तक राजनीतिक झटकों से उबर नहीं पाई है। उन्होंने कहा कि पार्टी के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत माता-पिता को लेकर अभद्र टिप्पणियां कर रहे हैं, जो राजनीतिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं हैं। दुबे ने राजनीतिक विरोध के दौरान भाषा की मर्यादा बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री के पद का सम्मान किया जाना चाहिए।
पत्रकारों से बातचीत में दुबे ने कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार चुनावी पराजयों के बावजूद पार्टी अपनी स्थिति सुधारने में सफल नहीं हो रही है। उनके मुताबिक, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी जैसे नेताओं की भूमिका के बावजूद कांग्रेस राजनीतिक चुनौतियों से बाहर नहीं निकल पा रही है। दुबे ने इसी संदर्भ में पार्टी पर अभद्र भाषा का सहारा लेने का आरोप लगाया।
भाजपा सांसद ने अपने बयान में वर्ष 1971-72 के दौर का भी उल्लेख किया। उन्होंने बांग्लादेश युद्ध के बाद तत्कालीन अमेरिकी नेताओं हेनरी किसिंजर और रिचर्ड निक्सन की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बारे में की गई अपमानजनक टिप्पणियों का जिक्र किया। दुबे के अनुसार, उस समय भारतीय राजनीति में वैचारिक मतभेद होने के बावजूद विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री के सम्मान से जुड़े मुद्दे पर उनका समर्थन किया था।
उन्होंने कहा कि उस दौर में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे विपक्षी नेताओं ने संसद में इंदिरा गांधी का बचाव किया था। दुबे ने इस उदाहरण के जरिए अपनी बात रखी कि राजनीतिक दलों के बीच मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन प्रधानमंत्री के पद के प्रति सम्मान बनाए रखना जरूरी है। उनके मुताबिक, राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के दौरान राष्ट्रीय नेतृत्व और संवैधानिक पदों की गरिमा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
दुबे ने मौजूदा राजनीतिक माहौल पर टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस्तेमाल की जा रही भाषा पर आपत्ति जताई। उन्होंने विशेष रूप से प्रधानमंत्री के दिवंगत माता-पिता को लेकर की जाने वाली टिप्पणियों को अनुचित बताया। भाजपा सांसद ने कहा कि राजनीतिक बहस में किसी नेता के परिवार के सदस्यों को निशाना बनाना उचित नहीं है। उनके अनुसार, विरोधियों को नीतियों और राजनीतिक फैसलों पर सवाल उठाने चाहिए, न कि व्यक्तिगत या पारिवारिक टिप्पणियों के जरिए विवाद बढ़ाना चाहिए।
भाजपा सांसद ने राहुल गांधी से जुड़े मानहानि मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने राहुल गांधी के बरी होने के संदर्भ में सवाल उठाते हुए कहा कि संबंधित मामला गृह मंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणी से जुड़ा था। दुबे ने यह भी पूछा कि क्या एक राजनीतिक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से दूसरे दल के नेता के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल लोकतांत्रिक आचरण माना जा सकता है। इस मुद्दे पर उन्होंने राजनीतिक संवाद की मर्यादा को लेकर अपनी आपत्ति जाहिर की।
दुबे ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों को सरकार की आलोचना करने और अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। हालांकि, उनके अनुसार, विरोध दर्ज कराने के लिए भाषा की मर्यादा बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब राजनीतिक विरोधी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने में असमर्थ होते हैं, तो वे अभद्र भाषा का सहारा लेते हैं। उनके बयान का मुख्य जोर राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सार्वजनिक संवाद में सम्मान और संयम बनाए रखने पर रहा।
