कारेलसोहन ने कहा कि एस्टोनिया की कंपनियां भारतीय कंपनियों की तुलना में आकार में अपेक्षाकृत छोटी हैं। देश में बड़े पैमाने पर विनिर्माण भी सीमित है। ऐसे में भारत जैसे विशाल बाजार में बड़े स्तर पर वस्तुओं का व्यापार और निर्यात करना एस्टोनियाई कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। एस्टोनिया का घरेलू बाजार भी छोटा है, इसलिए वहां की कंपनियों के लिए भारत में अपने कारोबार का विस्तार करने के लिए उपयुक्त क्षेत्रों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
राजदूत के मुताबिक, एस्टोनिया की कंपनियों की प्रमुख ताकत सेवाओं के क्षेत्र में है। डिजिटल सेवाओं, तकनीकी समाधान और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच साझेदारी की अच्छी संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों में भारतीय बाजार की जरूरतों के अनुरूप सेवाएं और समाधान उपलब्ध कराकर व्यावसायिक संबंधों को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि एस्टोनिया की कंपनियां इन क्षेत्रों में आगे विकास और सहयोग की संभावनाएं तलाश रही हैं।
वस्तुओं के व्यापार के संबंध में उन्होंने बताया कि एस्टोनिया की कुछ कंपनियां भारत में लकड़ी से बने उत्पाद, खाद्य पदार्थ, पेय पदार्थ और अन्य वस्तुओं की आपूर्ति करती हैं। देश में कुछ उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं, लेकिन उनकी कीमतें प्रतिस्पर्धी स्तर पर नहीं होतीं। इसके बावजूद गुणवत्ता को प्राथमिकता देने वाले ग्राहकों के बीच ऐसे उत्पादों की मांग हो सकती है। इस वजह से भारत में एस्टोनिया के उत्पादों के लिए सीमित लेकिन संभावित बाजार मौजूद है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया। एस्टोनिया यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों में शामिल है। कारेलसोहन ने उम्मीद जताई कि समझौता वर्ष 2026 के अंत तक लागू हो सकता है। उनके अनुसार, इससे मौजूदा सीमा शुल्क में कमी लाने के साथ-साथ गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करने में भी मदद मिल सकती है। ऐसी बाधाएं विशेष रूप से छोटी कंपनियों के लिए दूसरे देशों के बाजारों में कारोबार करना कठिन बनाती हैं।
राजदूत ने कहा कि भारत एस्टोनिया के लिए व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण बाजार है। कई देशों की तरह एस्टोनिया की भी प्राथमिकता भारत के साथ व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करना है। वह दोनों देशों के बीच व्यापारिक संपर्कों को और विकसित करना चाहती हैं। भारत का बड़ा बाजार एस्टोनियाई कंपनियों के लिए अपनी सेवाओं और उत्पादों की पहुंच बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।
कुल मिलाकर, भारत और एस्टोनिया के बीच सहयोग की संभावनाएं केवल पारंपरिक वस्तु व्यापार तक सीमित नहीं हैं। डिजिटल सेवाएं, तकनीक और साइबर सुरक्षा ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें दोनों देशों के व्यावसायिक संबंध आगे बढ़ सकते हैं। प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते से भी कारोबार की परिस्थितियों में बदलाव आने की उम्मीद है। हालांकि, समझौते के लागू होने और उसके वास्तविक प्रभाव का आकलन आगे होने वाले निर्णयों तथा व्यापारिक व्यवस्थाओं पर निर्भर करेगा।
