रिपोर्ट्स के मुताबिक वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में प्रारूप कैबिनेट नोट तैयार किया है। प्रस्तावित बदलाव को आगे बढ़ाने से पहले अन्य मंत्रालयों से उनकी राय मांगी गई है। भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने भी सरकारी बैंकों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने का समर्थन किया है। बताया जा रहा है कि केंद्रीय बैंक ने हाल ही में सरकार को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर जल्द विचार करने की सिफारिश की थी। ऐसे में आने वाले समय में इस प्रस्ताव पर सरकार का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फिलहाल भारत में निजी क्षेत्र के बैंकों के लिए एफडीआई की अधिकतम सीमा 74 प्रतिशत है जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में विदेशी निवेश की सीमा 20 प्रतिशत तक निर्धारित है। इस अंतर को कम करने के उद्देश्य से सरकारी बैंकों में निवेश की सीमा बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। देश के 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई में सबसे अधिक 11.07 प्रतिशत विदेशी निवेश दर्ज किया गया है। इसके बाद केनरा बैंक में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 10.55 प्रतिशत है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो सरकारी बैंकों के लिए विदेशी पूंजी आकर्षित करने के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
इस प्रस्ताव पर विचार ऐसे समय में किया जा रहा है जब वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत में विदेशी निवेश का प्रवाह मजबूत बना हुआ है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल से जून तिमाही के दौरान भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश छह प्रतिशत बढ़कर 19.81 अरब डॉलर हो गया। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 18.62 अरब डॉलर था। मासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल में एफडीआई लगभग दोगुना होकर 12.1 अरब डॉलर पहुंच गया जबकि एक साल पहले इसी महीने यह 6.6 अरब डॉलर था। मई में निवेश घटकर 2.8 अरब डॉलर रहा लेकिन जून में फिर बढ़कर 4.91 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार सेवा क्षेत्र विदेशी निवेश आकर्षित करने में सबसे आगे रहा। इस क्षेत्र में 7.04 अरब डॉलर का निवेश आया। कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर क्षेत्र को 2.84 अरब डॉलर तथा व्यापार क्षेत्र को 1.92 अरब डॉलर का विदेशी निवेश मिला। इसके अलावा गैर-पारंपरिक ऊर्जा क्षेत्र में 1.24 अरब डॉलर और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में 62.2 करोड़ डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। इक्विटी निवेश पुनर्निवेशित आय और अन्य पूंजी को शामिल करने वाला कुल एफडीआई अप्रैल से जून के दौरान लगभग 22 प्रतिशत बढ़कर 30.65 अरब डॉलर हो गया।
राज्यों की बात करें तो तमिलनाडु 5.95 अरब डॉलर के निवेश के साथ पहले स्थान पर रहा। महाराष्ट्र में 4.22 अरब डॉलर दिल्ली में 2.67 अरब डॉलर कर्नाटक में 2.11 अरब डॉलर और गुजरात में 1.3 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। अब सरकारी बैंकों में एफडीआई सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव पर सरकार के अंतिम निर्णय का इंतजार है। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में विदेशी निवेश की भूमिका बढ़ सकती है।
