इंदौर । इंदौर के कनकेश्वरी गरबा पंडाल में 15 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ कथित अभद्रता और धक्का-मुक्की का मामला लगातार चर्चा में है। इस मामले में भाजपा मंडल अध्यक्ष कमल चौहान के खिलाफ हीरा नगर पुलिस द्वारा प्रकरण दर्ज किए जाने के बाद उनका वीडियो सामने आया है। वीडियो में कमल चौहान अपनी सफाई देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि वह दोषी साबित होते हैं तो उन्हें कड़ी सजा दी जाए। उनके इस बयान के बाद मामले को लेकर बहस और तेज हो गई है।
जानकारी के मुताबिक कनकेश्वरी गरबा पंडाल में नाबालिग बालिका के साथ कथित अभद्रता और धक्का-मुक्की का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो सामने आने के बाद विवाद बढ़ा और मामले में कार्रवाई की मांग उठने लगी। इसके बाद हीरा नगर पुलिस ने कमल चौहान के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। मामले में पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई की बात सामने आने के बाद इसकी गंभीरता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
प्रकरण दर्ज होने के बाद कमल चौहान ने अपना पक्ष रखते हुए वीडियो जारी किया। उन्होंने दावा किया कि बालिका के पिता शराब के नशे में पंडाल पहुंचे थे और बालिका भी आयोजन स्थल के अंदर आने का प्रयास कर रही थी। कमल चौहान ने कहा कि वह कई वर्षों से गरबा आयोजन में सेवाएं देते आ रहे हैं। उन्होंने अपनी ओर से हुई गलती के लिए माफी मांगते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की।
अपने बयान में कमल चौहान ने यह भी कहा कि यदि जांच में वह दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें राजवाड़ा चौराहे पर फांसी पर लटका दिया जाए। उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक ओर कमल चौहान अपनी सफाई और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं तो दूसरी ओर लोग नाबालिग से जुड़े मामले में तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की आयोजन में मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। खबर के अनुसार घटना के कुछ समय बाद मुख्यमंत्री इसी गरबा आयोजन में पहुंचे थे और उन्होंने कन्या पूजन किया था। इसके बाद यह सवाल उठ रहा है कि घटना की जानकारी मुख्यमंत्री तक समय पर पहुंची थी या नहीं और पुलिस कार्रवाई में देरी क्यों हुई। इन सवालों पर स्थिति जांच और संबंधित अधिकारियों के बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मामले को लेकर सोशल मीडिया पर सरकार की कार्रवाई और कानून व्यवस्था को लेकर भी बहस हो रही है। कुछ लोग इस घटना की तुलना उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था से कर रहे हैं। हालांकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच के तथ्यों का सामने आना जरूरी है। नाबालिग से जुड़े इस संवेदनशील मामले में निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई महत्वपूर्ण है। फिलहाल कमल चौहान के खिलाफ दर्ज प्रकरण में आरोपों की पुष्टि होना बाकी है और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर बनी हुई है।
