भोपाल । मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी को लेकर तैयारियां अब अगले चरण में पहुंच गई हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब माध्यमिक शिक्षा मंडल आवेदकों की जिला और संभागवार सूची तैयार करने की दिशा में काम करेगा। इस सूची के आधार पर यह तय किया जाएगा कि प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में कितने परीक्षा केंद्रों की जरूरत होगी और उन्हें कहां बनाया जाना उचित रहेगा। परीक्षा की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ शिक्षकों का ब्योरा भी अलग-अलग तैयार किया जाएगा।
टीईटी के लिए कुल 34 हजार 200 शिक्षकों ने आवेदन किया है। जबकि प्रदेश में करीब डेढ़ लाख शिक्षकों के आवेदन करने की संभावना जताई जा रही थी। आवेदन की अंतिम तारीख दो बार बढ़ाए जाने के बावजूद आवेदकों की संख्या में अपेक्षा के मुताबिक बढ़ोतरी नहीं हुई। अब परीक्षा से जुड़ी तैयारियां इसी वास्तविक संख्या को ध्यान में रखकर की जाएंगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आवेदन करने वालों में लगभग 20 हजार सरकारी स्कूलों के शिक्षक हैं जबकि करीब 14 हजार शिक्षक निजी स्कूलों से जुड़े हैं।
स्कूल शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सितंबर में शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी। आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 11 अक्टूबर निर्धारित की गई थी। प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब माध्यमिक शिक्षा मंडल को कर्मचारी चयन मंडल से सभी आवेदकों की विस्तृत सूची मिलने का इंतजार है। सूची उपलब्ध होने के बाद शिक्षकों की पदस्थापना और उनके कार्यक्षेत्र के आधार पर आंकड़े तैयार किए जाएंगे।
जिला और संभागवार सूची तैयार होने से परीक्षा केंद्रों की योजना बनाने में मदद मिलेगी। अधिकारियों को यह जानकारी मिल सकेगी कि किस जिले में कितने शिक्षकों ने आवेदन किया है और उनमें से कितने शहरी तथा कितने ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ हैं। इसके आधार पर केंद्रों की संख्या और उनकी जगह तय करने पर विचार किया जाएगा। कोशिश रहेगी कि परीक्षा की व्यवस्था आवेदकों की संख्या और क्षेत्रीय जरूरतों के अनुरूप बनाई जा सके।
परीक्षा की तारीख और केंद्रों के निर्धारण को लेकर दशहरे के बाद अधिकारियों की बैठक प्रस्तावित है। इसमें माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव बुद्धेश वैद्य और लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह सहित संबंधित अधिकारी शामिल हो सकते हैं। बैठक में आवेदकों की संख्या के साथ परीक्षा कराने के लिए जरूरी संसाधनों और व्यवस्थाओं पर चर्चा होगी। इसके बाद परीक्षा की तारीख तय करने और आधिकारिक कार्यक्रम जारी करने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
इस परीक्षा का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग के 32 हजार से अधिक पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया इसके इंतजार में है। परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले सरकारी शिक्षकों को रिक्त पदों की उपलब्धता और लागू नियमों के अनुसार पदोन्नति का अवसर मिल सकता है। विभागीय स्तर पर जनवरी में परिणाम आने की स्थिति में पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि वास्तविक समयसीमा परीक्षा के आयोजन परिणाम और उपलब्ध रिक्त पदों पर निर्भर करेगी।
दूसरी ओर शिक्षक संगठनों का विरोध भी जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने 22 दिसंबर तक अपना आंदोलन स्थगित किया है लेकिन संगठन अब भी टीईटी नहीं कराने की मांग पर कायम है। संगठन चाहता है कि विधानसभा में संकल्प पारित कर तमिलनाडु सरकार की तर्ज पर केंद्र सरकार को कानून में बदलाव का प्रस्ताव भेजा जाए। फिलहाल राज्य सरकार की ओर से इस मांग को मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में एक तरफ परीक्षा केंद्रों और तारीख को लेकर तैयारियां आगे बढ़ रही हैं तो दूसरी तरफ शिक्षक संगठनों की मांग के कारण यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है।
