भोपाल । भोपाल में बेटियों के नाम दान की जा चुकी जमीन को गिरवी रखकर बैंक से दो करोड़ रुपए का कर्ज लेने के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी ईओडब्ल्यू ने बिल्डर जीशान अली और उनकी पत्नी नाजनीन अली के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोप है कि दंपती ने जमीन के मालिकाना हक से जुड़ी अहम जानकारी पंजाब नेशनल बैंक से छिपाई और इसी संपत्ति के आधार पर अपनी कंपनी के लिए ओवरड्राफ्ट लिमिट मंजूर कराई। कर्ज की अदायगी नहीं होने पर जब बैंक ने वसूली की प्रक्रिया शुरू की तो जमीन की मालकिन बताई गई बेटियों के जरिए अदालत में मुकदमा दायर कराया गया। ईओडब्ल्यू ने पूरे घटनाक्रम और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद यह कार्रवाई की है।
मामला भोपाल के बावड़ियाकलां इलाके की 526.83 वर्गमीटर व्यावसायिक जमीन से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक वर्ष 2007 में शादाब गृह निर्माण सहकारी समिति की ओर से जारी टेंडर में जीशान अली अकेले बोलीदाता थे। इसके बाद पांच फरवरी 2008 को जमीन की रजिस्ट्री उनके नाम हुई। करीब पांच साल बाद 10 जुलाई 2013 को जीशान ने हिबानामा तैयार कर यह जमीन अपनी तीन बेटियों के नाम कर दी। इनमें से दो बेटियां उस समय नाबालिग थीं। जांच के अनुसार जीशान ने वर्ष 2018 में बैंक को लिखे एक पत्र में भी जमीन बेटियों के नाम करने की बात स्वीकार की थी।
आरोप है कि जमीन का हस्तांतरण होने के बावजूद 24 सितंबर 2015 को जीशान अली की कंपनी रॉयल हेरिटेज बिल्डर्स कॉलोनाइजर्स के लिए दो करोड़ रुपए की ओवरड्राफ्ट लिमिट मंजूर कराई गई। इस प्रक्रिया में बैंक को जमीन बेटियों के नाम किए जाने की जानकारी नहीं दी गई। जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार लीगल सर्च रिपोर्ट में भी नाबालिग के हित से जुड़े कॉलम में नन दर्ज था। ईओडब्ल्यू इस पहलू की जांच कर रही है कि जमीन के वास्तविक मालिकाना हक से संबंधित जानकारी बैंक के सामने किस तरह रखी गई और ऋण मंजूर कराने की प्रक्रिया में किन दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ।
जांच में फरवरी 2015 की एक अन्य घटना का भी उल्लेख है। उस समय जीशान और नाजनीन ने अपनी नाबालिग बेटी के नाम दर्ज एक दूसरे प्लॉट को बेचने के लिए जिला अदालत से अनुमति ली थी। ईओडब्ल्यू ने इस तथ्य को नाबालिग की संपत्ति से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी के संदर्भ में देखा है। हालांकि मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।
वर्ष 2017 में कंपनी का कर्ज खाता एनपीए हो गया। इसके बाद बैंक ने वसूली की कार्रवाई शुरू करने की तैयारी की। बैंक की ओर से तीन जनवरी 2018 को सरफेसी नोटिस जारी किए जाने से पहले ही चार अक्टूबर 2017 को बेटियों के जरिए सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर किया गया था। इसमें दावा किया गया कि जमीन उनकी संपत्ति है और बैंक उसे जब्त नहीं कर सकता। बैंक ने इस मुकदमे को वसूली की कार्रवाई रोकने के लिए की गई मिलीभगत का हिस्सा बताया था। सिविल कोर्ट से दावा खारिज होने के बाद मामला ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरण यानी डीआरएटी इलाहाबाद पहुंचा।
आठ मार्च 2019 को ऋण वसूली न्यायाधिकरण ने बैंक के पक्ष में फैसला देते हुए रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया। इसके बावजूद बैंक का 2 करोड़ 7 लाख 86 हजार 807 रुपए से अधिक बकाया बताया गया है। ईओडब्ल्यू ने इसी पूरे घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए बिल्डर जीशान अली और उनकी पत्नी नाजनीन अली के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। कंपनी की डायरेक्टर और गारंटर रहीं जीशान की मां का निधन हो चुका है इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। अब जांच में ऋण से जुड़े दस्तावेजों और जमीन के हस्तांतरण की परिस्थितियों की पड़ताल की जाएगी।
