भारत और तुर्किये के संबंधों में पाकिस्तान का मुद्दा लंबे समय से संवेदनशील रहा है। दोनों देशों के बीच बढ़ती सैन्य साझेदारी भारत की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को प्रभावित करती है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्किये ने पाकिस्तान को बेयराक्तार ड्रोन दिए थे, जिनका पाकिस्तान ने सीमा पर इस्तेमाल किया। इसके अलावा तुर्किये पाकिस्तान के साथ मक्का रक्षा गठबंधन में भी शामिल है। अंकारा और इस्लामाबाद ने रक्षा उत्पादन तथा नौसैनिक सहयोग को भी बढ़ाया है। तुर्किये पाकिस्तान के लिए युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम में भी भागीदारी कर रहा है।
इस पृष्ठभूमि में भारत ने ग्रीस और साइप्रस के साथ अपने रक्षा संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान दिया है। भारत और साइप्रस के बीच रक्षा सहयोग के लिए छह साल का विशेष रोडमैप तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सामरिक सहयोग को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना है। वहीं, ग्रीस के साथ भारत ने हाल ही में द्विपक्षीय सैन्य सहयोग योजना पर हस्ताक्षर किए हैं। रक्षा उद्योगों के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए दोनों पक्षों ने एक साझा घोषणा पत्र का आदान-प्रदान भी किया है।
ग्रीस की भौगोलिक स्थिति भारत के लिए रणनीतिक महत्व रखती है। यह यूरोप के पूर्वी प्रवेश द्वार के रूप में अहम भूमिका निभाता है और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे के लिए भी महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। यह आर्थिक गलियारा भारत को यूरोपीय बाजारों से जोड़ने की योजना का हिस्सा है। ऐसे में ग्रीस के साथ बढ़ते संबंध केवल रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके व्यापक रणनीतिक और आर्थिक मायने भी हैं।
आने वाले समय में भारत और ग्रीस सैन्य प्रशिक्षण, समुद्री निगरानी, रक्षा तकनीक तथा संयुक्त उत्पादन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। इन क्षेत्रों में तालमेल से दोनों देशों को अपनी क्षमताएं मजबूत करने और रक्षा उद्योगों के बीच साझेदारी को बढ़ावा देने का अवसर मिलेगा। समुद्री सुरक्षा पर सहयोग भी इस साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि भूमध्यसागर क्षेत्र में रणनीतिक गतिविधियां भारत के व्यापक अंतरराष्ट्रीय हितों से जुड़ी हुई हैं।
भारत, ग्रीस और साइप्रस के बीच त्रिपक्षीय सामरिक सहयोग को तुर्किये-पाकिस्तान रक्षा साझेदारी के जवाब में एक महत्वपूर्ण विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। भारत के लिए इन दोनों देशों के साथ संबंध मजबूत करना अपनी रणनीतिक संभावनाओं का विस्तार करने का माध्यम है। रक्षा सचिव की यात्रा और हाल में हुए समझौतों से संकेत मिलता है कि भारत क्षेत्रीय समीकरणों पर नजर रखते हुए विभिन्न देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी प्रत्यक्ष सैन्य टकराव या नई सैन्य तैनाती की घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल भारत का जोर रक्षा साझेदारी, सैन्य सहयोग और समुद्री सुरक्षा के जरिए अपने रणनीतिक विकल्प मजबूत करने पर है।
