शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों की कार्यशैली पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि उनके क्षेत्र में अन्याय और जुल्म की हद पार कर दी गई है। उन्होंने गांव की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि जिन घरों में सुबह तक परिवार रह रहे थे और बच्चों की आवाजें सुनाई दे रही थीं, वहां अब बच्चों की चीखें गूंज रही हैं। उनके मुताबिक, घरों को गिरा दिया गया और फसलें भी दब गईं। उन्होंने प्रभावित महिलाओं के रोने और परिवारों की पीड़ा का उल्लेख करते हुए कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को संवेदनहीन बताया।
गुस्से में शिवराज ने संबंधित अधिकारियों के लिए बेहद कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया और उन्हें ‘नरपिशाच’ तक कह दिया। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जानकारी वह मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने रखेंगे। शिवराज की मांग है कि जिन अधिकारियों ने यह कार्रवाई की, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो। उन्होंने इस मामले को केवल प्रशासनिक कार्रवाई का विषय नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों के साथ हुए व्यवहार से जुड़ा गंभीर मामला बताया।
घटना के बाद शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से फोन पर बात की। उन्होंने दोनों नेताओं को घटनाक्रम की जानकारी दी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस बातचीत के बाद सरकार या प्रशासन की ओर से लिए गए किसी अंतिम निर्णय का उल्लेख नहीं है। फिलहाल शिवराज की नाराजगी और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग इस मामले के प्रमुख पहलू बने हुए हैं।
इस घटनाक्रम ने शिवराज सिंह चौहान की वर्तमान राजनीतिक भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। वर्ष 2023 से पहले तक वह मध्य प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री के रूप में सक्रिय थे। उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व की पहचान आम लोगों से जुड़ाव, ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच और महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाने वाले नेता के रूप में रही। कभी उन्हें ‘पांव-पांव वाले भैया’ के नाम से जाना गया, तो कभी लाड़ली बहनों के भाई के रूप में उनकी छवि सामने आई। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने आम लोगों के बीच अपनी सहज उपस्थिति बनाए रखने की कोशिश की थी।
अब बुधनी और विदिशा से जुड़े सांसद के रूप में उनकी भूमिका के बीच कुसमी की घटना पर उनकी तीखी प्रतिक्रिया चर्चा का विषय बनी है। सवाल यह उठ रहा है कि उनकी नाराजगी केवल अधिकारियों की कार्यशैली तक सीमित है या इसके राजनीतिक मायने भी हैं। कांग्रेस इस घटनाक्रम को शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री मोहन यादव के बीच संभावित मतभेदों से जोड़कर देख रही है। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच किसी टकराव की पुष्टि करने वाली जानकारी सामने नहीं आई है।
बुधनी शिवराज सिंह चौहान का लंबे समय तक राजनीतिक आधार रहा है, जहां से वह लगातार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। ऐसे में इसी क्षेत्र में आदिवासी परिवारों के घरों पर हुई कार्रवाई के बाद उनका खुद गांव पहुंचना और अधिकारियों के खिलाफ खुलकर बोलना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। अब इस मामले में आगे की प्रशासनिक कार्रवाई और प्रभावित परिवारों को लेकर उठाए जाने वाले कदमों पर नजर रहेगी।
