एमसीएक्स पर 4 दिसंबर को डिलीवरी वाला सोना पिछले कारोबारी सत्र में 1,51,499 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। सोमवार को यह 1,51,596 रुपये पर खुला, लेकिन शुरुआती कारोबार में बिकवाली बढ़ने से भाव गिरकर 1,50,056 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर पर पहुंच गया। इस तरह सोने में 1,443 रुपये यानी करीब 0.95 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने के लिए 1,50,000 से 1,50,700 रुपये का दायरा महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर है।
चांदी में भी कारोबार के दौरान दबाव बना रहा। एमसीएक्स पर दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी पिछले सत्र में 2,25,755 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। सोमवार को यह 2,25,494 रुपये पर खुली, जो पिछले बंद भाव से करीब 0.11 प्रतिशत कम था। इसके बाद कीमत और नीचे आई तथा चांदी 2,24,203 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गई। इस दौरान इसमें 1,552 रुपये यानी लगभग 0.68 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों का मानना है कि औद्योगिक मांग चांदी को कुछ समर्थन दे सकती है, लेकिन रुपये की मजबूती निकट भविष्य में इसकी कीमतों पर दबाव बनाए रख सकती है।
वैश्विक बाजार में तस्वीर कुछ अलग रही। कॉमेक्स पर सोना 4,200 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि चांदी का भाव करीब 61.1 डॉलर प्रति औंस रहा। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में गिरावट की एक प्रमुख वजह रुपये में संभावित मजबूती की उम्मीद है। भारतीय रिजर्व बैंक के हालिया कदमों से रुपये को समर्थन मिलने की संभावना के बीच निवेशक इस घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं। रुपया मजबूत होने पर आयातित सोना और चांदी घरेलू बाजार में अपेक्षाकृत सस्ते पड़ सकते हैं।
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में अमेरिका के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई के आंकड़े और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति शामिल हैं। बाजार में दिसंबर के दौरान ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की उम्मीद भी बनी हुई है। आम तौर पर ऊंची ब्याज दरें सोने जैसी ऐसी संपत्तियों का आकर्षण घटा सकती हैं, जिनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता। इसलिए आने वाले आर्थिक आंकड़ों के आधार पर निवेशकों की रणनीति में बदलाव देखने को मिल सकता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। संयुक्त राष्ट्र की व्यापार एवं विकास एजेंसी ने 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर घटकर 2.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव को भी आर्थिक जोखिमों में शामिल किया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, भू-राजनीतिक अनिश्चितता लंबे समय में सोने की सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में मांग को समर्थन दे सकती है।
तकनीकी स्तरों के लिहाज से सोने के लिए 1.50 लाख रुपये के आसपास का भाव अहम माना जा रहा है। यह स्तर टूटने पर कीमत 1.48 लाख रुपये तक जा सकती है, जबकि ऊपर की ओर 1.52 लाख से 1.53 लाख रुपये का दायरा प्रमुख प्रतिरोध स्तर है। चांदी के लिए 2.24 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर महत्वपूर्ण है। कीमतों में मजबूती आने पर इसका भाव 2.28 लाख रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।
