नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी तपस्या संयम और साधना की प्रतीक हैं। उनकी पूजा करने से भक्तों को धैर्य आत्मविश्वास और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है। नवरात्रि के इस दिन श्रद्धालु विधि विधान से माता की पूजा करते हैं और जीवन में सुख शांति तथा सफलता की कामना करते हैं। वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्टूबर से हुआ है। इस क्रम में नवरात्रि का दूसरा दिन 12 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत शांत और तेजस्वी माना जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी कारण उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। माता के एक हाथ में जप की माला और दूसरे हाथ में कमंडल सुशोभित रहता है। उनका यह स्वरूप साधना दृढ़ संकल्प और आत्मसंयम का संदेश देता है। मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की आराधना करने से भक्तों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और मुश्किल समय में धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।
नवरात्रि के दूसरे दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर मां दुर्गा और मां ब्रह्मचारिणी का स्मरण करें। माता के सामने दीपक जलाएं और पुष्प अक्षत चंदन तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धा के साथ मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करें और उनके मंत्र का जाप करें। पूजा के दौरान मन को शांत रखते हुए माता से परिवार की सुख समृद्धि और जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने की प्रार्थना करें। इसके बाद आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए यह मंत्र विशेष रूप से प्रचलित है।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए यह मंत्र विशेष रूप से प्रचलित है।
मंत्र:
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः।
मान्यता के अनुसार इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करने से मन को एकाग्र करने और साधना के प्रति समर्पण बढ़ाने में मदद मिलती है। भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार मंत्र जाप कर सकते हैं। पूजा के दौरान माता के स्वरूप का ध्यान करना और अच्छे विचारों को अपनाने का संकल्प लेना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः।
मान्यता के अनुसार इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करने से मन को एकाग्र करने और साधना के प्रति समर्पण बढ़ाने में मदद मिलती है। भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार मंत्र जाप कर सकते हैं। पूजा के दौरान माता के स्वरूप का ध्यान करना और अच्छे विचारों को अपनाने का संकल्प लेना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर और मिश्री का भोग लगाने की परंपरा प्रचलित है। कुछ भक्त माता को फल और दूध से बनी मिठाइयां भी अर्पित करते हैं। भोग लगाते समय स्वच्छता और श्रद्धा का ध्यान रखना चाहिए। इसके बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य भक्तों में बांटा जा सकता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी स्वास्थ्य स्थिति और परंपरा के अनुसार फलाहार करते हैं। व्रत के दौरान शरीर को पर्याप्त पानी देना और जरूरत के अनुसार पौष्टिक आहार लेना भी जरूरी है।
धार्मिक मान्यताओं में मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या और त्याग की देवी माना जाता है। उनकी पूजा भक्तों को यह संदेश देती है कि जीवन में सफलता पाने के लिए धैर्य अनुशासन और निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। नवरात्रि के दूसरे दिन श्रद्धालु पूजा पाठ के साथ जरूरतमंदों की सहायता करने और अपने व्यवहार में विनम्रता बनाए रखने का संकल्प भी ले सकते हैं।
इस प्रकार नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना के साथ आत्मसंयम और दृढ़ इच्छाशक्ति को अपनाने का अवसर है। भक्त श्रद्धा से माता की पूजा कर सकारात्मक जीवन की कामना करते हैं। ध्यान रखें कि पूजा की विधि और भोग की परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों तथा परिवारों में भिन्न हो सकती हैं। सबसे महत्वपूर्ण है श्रद्धा स्वच्छता और सच्चे मन से माता का स्मरण करना।
