वीडियो में ममता बनर्जी कविता की शैली में कहती हैं, “जॉनी-जॉनी यस पापा, एसआईआर नो पापा, ज्ञानेश कुमार यस पापा, रेजिग्नेश यस पापा, रिमूव यस पापा, अरेस्ट एस पापा, सेव डेमोक्रेसी यस पापा, सेव इंडिया यस पापा।” इस रचनात्मक प्रस्तुति के जरिए उन्होंने SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर अपनी आपत्ति जाहिर की। कविता के परिचित अंदाज का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने अपने राजनीतिक संदेश को सामने रखा। वीडियो में भाजपा सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर भी टिप्पणी की गई है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने यह वीडियो सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किया। उन्होंने ममता बनर्जी की तारीफ करते हुए लिखा कि ममता दीदी हमेशा की तरह कमाल हैं। सुले ने वीडियो के संदेश को हास्य के साथ लोकतंत्र बचाने की गंभीर अपील बताया। उन्होंने ‘लोकतंत्र बचाओ, भारत बचाओ’ के संदेश का उल्लेख किया। वीडियो साझा किए जाने के बाद SIR और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे फिर चर्चा में आ गए।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। विपक्षी नेताओं की प्रमुख आपत्तियों में मतदाता सूची से संबंधित कथित अनियमितताएं और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता शामिल हैं। ममता बनर्जी ने भी अपने वीडियो के माध्यम से इन मुद्दों पर विरोध जताया है। हालांकि, वीडियो में लगाए गए राजनीतिक आरोप अपने आप में किसी अनियमितता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करते।
इससे पहले 9 अक्टूबर को विपक्षी गठबंधन INDIA के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा था। इस प्रतिनिधिमंडल में ममता बनर्जी भी शामिल थीं। मुलाकात का उद्देश्य विपक्ष की ओर से उठाई जा रही चिंताओं को राष्ट्रपति के सामने रखना था।
मुलाकात के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दावा किया था कि राष्ट्रपति ने विपक्ष की चिंताओं को सुना। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए थे। ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए थे और उनकी स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
विपक्ष लगातार SIR और चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे पर सवाल उठा रहा है। ममता बनर्जी का वायरल वीडियो इसी राजनीतिक विरोध की कड़ी के रूप में सामने आया है। बच्चों की कविता के अंदाज में दिए गए संदेश के जरिए उन्होंने चुनाव आयोग और भाजपा के खिलाफ अपनी आपत्तियां जाहिर कीं। सुप्रिया सुले द्वारा वीडियो साझा किए जाने से यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा में और प्रमुखता से आया है। फिलहाल, चुनावी प्रक्रिया में कथित धांधली और अनियमितताओं से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
