उज्जैन । उज्जैन में नवरात्रि पर्व को लेकर उत्साह बढ़ने लगा है और शहर से लेकर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में दुर्गा उत्सव की तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच गई हैं। दुर्गा पंडालों को सजाने के साथ ही आयोजक माता की प्रतिमाओं की स्थापना के लिए व्यवस्थाएं जुटा रहे हैं। मूर्ति निर्माण करने वाले कलाकार भी प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में व्यस्त हैं। इस बार उज्जैन में 4 फीट से लेकर 16 फीट तक की दुर्गा प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। अलग-अलग आकार और स्वरूपों में बनाई गई इन प्रतिमाओं के जरिए श्रद्धालुओं को मां दुर्गा के पारंपरिक और आकर्षक रूपों के दर्शन होंगे।
मूर्ति कलाकार विजय पाल के अनुसार बंगाल और कोलकाता से आए कारीगर प्रतिमा निर्माण में जुटे हैं। यहां पारंपरिक स्वरूपों के साथ पर्यावरण को ध्यान में रखकर बनाई गई प्रतिमाएं भी तैयार की जा रही हैं। महिषासुर मर्दिनी के रूप में मां दुर्गा की प्रतिमाएं भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगी। कलाकारों को एक प्रतिमा तैयार करने में करीब चार से पांच दिन का समय लगता है। प्रतिमा की ऊंचाई डिजाइन और बारीक कारीगरी के अनुसार निर्माण में लगने वाला समय अलग-अलग हो सकता है।
इस बार प्रतिमा निर्माण की लागत बढ़ने का असर कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। कलाकारों के मुताबिक कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण दुर्गा प्रतिमाओं के दाम लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इससे आयोजक समितियों को अपने बजट के अनुसार प्रतिमाओं का चयन करना पड़ रहा है। इसके बावजूद नवरात्रि को लेकर श्रद्धालुओं और आयोजन समितियों में उत्साह बना हुआ है। कई स्थानों पर पंडालों की सजावट और अन्य तैयारियां भी साथ-साथ की जा रही हैं।
इस बार प्रतिमाओं के निर्माण में पर्यावरण का ध्यान रखने पर भी जोर दिया जा रहा है। कलाकारों के अनुसार प्रतिमाओं के लिए कोलकाता से मिट्टी मंगाई जाती है। इन प्रतिमाओं को पूरी तरह मिट्टी से तैयार किया जा रहा है और इनमें प्लास्टर ऑफ पेरिस यानी पीओपी का इस्तेमाल नहीं किया जाता। प्रतिमाओं को रंगने के लिए प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है। इससे पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को कम करने में मदद मिल सकती है। मिट्टी से बनी प्रतिमाएं पारंपरिक शिल्पकला और धार्मिक आस्था से भी जुड़ी हुई हैं।
उज्जैन जिले में इस बार नवरात्रि के दौरान एक हजार से अधिक स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित किए जाने की तैयारी है। शहर के विभिन्न इलाकों और आसपास के क्षेत्रों में आयोजन समितियां पंडालों की व्यवस्था करने में जुटी हैं। प्रतिमाओं की स्थापना के साथ ही श्रद्धालुओं की आवाजाही और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाएं बनाना भी आयोजकों के लिए जरूरी होगा। नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के पंडालों तक पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने भी समितियों से सावधानी बरतने की अपील की है।
पुलिस और प्रशासन ने दुर्गा उत्सव समितियों को पंडालों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और निगरानी की व्यवस्था मजबूत रखने के लिए कहा है। इसके साथ ही देर रात तेज आवाज में डीजे नहीं बजाने की अपील भी की गई है। इसका उद्देश्य धार्मिक आयोजन के दौरान व्यवस्था बनाए रखना और आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी से बचाना है। आयोजकों को सुरक्षा और अनुशासन से जुड़े निर्देशों का पालन करने की जरूरत होगी।
कुल मिलाकर उज्जैन में नवरात्रि के स्वागत की तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। एक हजार से अधिक स्थानों पर प्रतिमा स्थापना की तैयारी और 16 फीट तक की भव्य प्रतिमाएं इस बार के उत्सव को खास बना सकती हैं। पारंपरिक शिल्पकला के साथ पर्यावरण अनुकूल प्रतिमाओं पर जोर और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन की अपील से नवरात्रि आयोजन को व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जा रही है।
