8 अक्टूबर को आश्विन माह का पहला प्रदोष व्रत होगा। आश्विन कृष्ण त्रयोदशी तिथि 7 अक्टूबर की रात 11 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर 8 अक्टूबर की रात 10 बजकर 15 मिनट तक रहेगी। गुरु प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ समय शाम 5 बजकर 59 मिनट से रात 8 बजकर 27 मिनट तक बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुरु प्रदोष व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होने का फल मिलता है। इस दिन शिव उपासना करने वाले भक्त व्रत रखकर विशेष पूजा कर सकते हैं।
इसी दिन मासिक शिवरात्रि का भी संयोग बन रहा है। आश्विन कृष्ण चतुर्दशी तिथि 8 अक्टूबर की रात 10 बजकर 15 मिनट से शुरू होकर 9 अक्टूबर की रात 9 बजकर 35 मिनट तक रहेगी। निशिता मुहूर्त के आधार पर मासिक शिवरात्रि 8 अक्टूबर को मानी जाएगी। शिवरात्रि की निशिता पूजा का समय रात 11 बजकर 44 मिनट से देर रात 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। शिव भक्त इस अवधि में भगवान शिव की पूजा और आराधना कर सकते हैं।
8 अक्टूबर को पितृ पक्ष का त्रयोदशी श्राद्ध भी किया जाएगा। इस दिन त्रयोदशी की उदयातिथि मिलने के कारण उन पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाएगा, जिनका निधन किसी भी महीने की त्रयोदशी तिथि को हुआ हो। श्राद्ध कर्म के लिए कुतुप मुहूर्त सुबह 11 बजकर 45 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इसके बाद रौहिण मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 32 मिनट से 1 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। अपराह्न काल दोपहर 1 बजकर 19 मिनट से 3 बजकर 39 मिनट तक बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्राद्ध और तर्पण से पितरों की तृप्ति होती है और पिशाच योनि में फंसे पितरों के उद्धार की मान्यता है।
इस दिन शुक्ल योग भी रहेगा। शुक्ल योग सुबह से देर रात 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। इसके बाद ब्रह्म योग शुरू होगा, जिसे भी शुभ योग माना गया है। इसके साथ ही 8 अक्टूबर को इस महीने का दूसरा गुरुवार व्रत भी रखा जाएगा। इस व्रत में भगवान विष्णु की पूजा और उपवास करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु की कृपा से दांपत्य जीवन सुखमय होता है, विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और कुंडली में गुरु दोष से मुक्ति मिलने की मान्यता है।
8 अक्टूबर की रात भद्रा लगने की बात भी बताई गई है, लेकिन इसे लेकर इस दिन होने वाले धार्मिक कर्मों पर कोई विशेष अहित नहीं माना गया है। गुरु प्रदोष, मासिक शिवरात्रि, त्रयोदशी श्राद्ध, शुक्ल योग, ब्रह्म योग और गुरुवार व्रत के कारण यह दिन धार्मिक गतिविधियों के लिहाज से खास माना जा रहा है। शिव भक्त इस दिन व्रत और पूजा कर भगवान शिव की आराधना कर सकते हैं, जबकि पितृ पक्ष के नियमों के अनुसार त्रयोदशी श्राद्ध और तर्पण भी किया जा सकता है।
