आंदोलन से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, अब तक करीब 190 छात्र घायल हुए हैं, जबकि पुलिस ने लगभग 5 हजार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में करीब 85 प्रतिशत छात्र नाबालिग बताए गए हैं। छात्र संगठनों ने मंगलवार को होने वाले आंदोलन में अधिक से अधिक लोगों से शामिल होने की अपील की थी। कई शिक्षक संगठनों ने भी प्रदर्शन को समर्थन देने का ऐलान किया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उसके अनुपात में कक्षाएं, शिक्षक और दूसरी जरूरी सुविधाएं नहीं बढ़ाई गई हैं।
आंदोलन के बीच फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्तियन लेकोर्नू ने छात्रों और शिक्षकों की समस्याओं को दूर करने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाने का ऐलान किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि हिंसक प्रदर्शन के मामले में सरकार की ओर से नरमी नहीं बरती जाएगी। शिक्षा मंत्री एडुआर जॉफ्रे ने बताया कि आंदोलन शुरू होने के बाद से 24 स्कूलों में बड़े स्तर पर तोड़फोड़ की गई और कुछ स्कूलों को आग के हवाले भी किया गया।
इस आंदोलन की शुरुआत 21 सितंबर को पेरिस के एक स्कूल से हुई थी। छात्रों ने स्कूल में स्टाफ और संसाधनों की कमी को दूर करने की मांग उठाई थी। जब उनकी मांगें पूरी हुईं तो संबंधित छात्रों ने हड़ताल खत्म कर दी, लेकिन तब तक आंदोलन दूसरे इलाकों तक पहुंच चुका था। धीरे-धीरे इसका विस्तार कॉलेज और विश्वविद्यालयों तक भी हो गया। पिछले दो दशकों में फ्रांस के माध्यमिक स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ी है, जबकि उसके अनुपात में शिक्षकों की संख्या नहीं बढ़ सकी है। इस अवधि में छात्रों की संख्या करीब ढाई लाख बढ़ने की बात सामने आई है।
फ्रांस में 2010 में करीब साढ़े 8 लाख बच्चों का जन्म हुआ था, जो 1980 के दशक के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा बताया गया है। बच्चों के जन्म में इस बढ़ोतरी के पीछे 30 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में बढ़ी प्रजनन दर को प्रमुख कारण बताया गया है। 2010 में जन्मे बच्चे अब करीब 15 से 16 साल के हो चुके हैं और हाई स्कूलों में पढ़ रहे हैं। छात्रों की संख्या बढ़ने के बावजूद स्कूलों में कक्षाओं, सुविधाओं और शिक्षकों की संख्या उसी अनुपात में नहीं बढ़ी।
फ्रांस में जारी विरोध केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है। सरकारी कर्मचारी, फायर फाइटर, शिक्षक और स्वास्थ्यकर्मी भी वेतन बढ़ोतरी समेत अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। देश इस समय ईरान और यूक्रेन युद्ध की वजह से आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। फ्रांस पर करीब 4 ट्रिलियन डॉलर का सरकारी कर्ज बताया गया है, जो उसकी सालाना अर्थव्यवस्था के करीब 119 प्रतिशत के बराबर है। आबादी के बूढ़े होने के कारण पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकारी खर्च भी लगातार बढ़ रहा है।
