आदि कैलाश में जाम के पीछे हालिया बर्फबारी के साथ वाहनों की बढ़ती संख्या भी प्रमुख कारण मानी जा रही है। सड़क से बर्फ हटाने के बाद भी दोनों किनारों पर तीन से चार फीट तक बर्फ के ढेर बने हुए हैं। इससे मार्ग संकरा हो गया है। यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ निजी वाहनों का दबाव भी बढ़ा है। ऐलागाड़, कुलागाड़, एस बैंड और मलघाट जैसे संवेदनशील हिस्सों में सड़क पहले से ही अपेक्षाकृत संकरी है। इन स्थानों पर एक साथ अधिक वाहन पहुंचने पर आमने-सामने से वाहनों को निकालना मुश्किल हो जाता है। बर्फबारी के कारण सड़क की स्थिति खराब होने से समस्या और बढ़ जाती है। एक जगह वाहन रुकने पर पीछे आने वाले वाहनों पर भी इसका असर पड़ता है और धीरे-धीरे लंबी कतार बन जाती है।
आदि कैलाश करीब 4,420 मीटर यानी 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। कुछ वर्ष पहले तक यहां दुर्गम पहाड़ी रास्ते और मौसम की कठिन परिस्थितियां यात्रा में सबसे बड़ी चुनौती मानी जाती थीं। अब वाहनों का बढ़ता दबाव भी नई परेशानी बन गया है। आदि कैलाश मार्ग चीन सीमा तक पहुंच का प्रमुख रास्ता होने के साथ सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। बीआरओ की ओर से सड़क को बेहतर बनाने और कई हिस्सों में डामरीकरण किए जाने के बाद यहां वाहनों की आवाजाही पहले की तुलना में आसान हुई है। इसका असर श्रद्धालुओं की यात्रा पर भी पड़ा है और देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग अपने वाहनों से आदि कैलाश पहुंच रहे हैं।
पर्यटकों और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या का असर वाहनों की संख्या पर भी साफ दिखाई दे रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2023 में आदि कैलाश क्षेत्र में 10,079 पर्यटक पहुंचे थे। 2024 में यह संख्या बढ़कर 29,423 हो गई और 2025 में 31,558 पर्यटक यहां पहुंचे। 2026 में अब तक यह आंकड़ा 61,950 तक पहुंच चुका है। यानी कुछ ही वर्षों में यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में तीन गुना से अधिक बढ़ोतरी हुई है। बढ़ती आवाजाही के बीच उच्च हिमालयी क्षेत्र की सीमित सड़क चौड़ाई और मौसम की परिस्थितियां यातायात व्यवस्था के लिए चुनौती बन रही हैं।
आदि कैलाश क्षेत्र में वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है और पुलिसकर्मी यातायात व्यवस्था को सुचारु करने में जुटे हैं। फिलहाल जाम की समस्या के पीछे मुख्य वजह हालिया बर्फबारी बताई जा रही है। सड़क से बर्फ हटाए जाने के बावजूद किनारों पर जमा बर्फ के कारण मार्ग की चौड़ाई कम बनी हुई है। इसके साथ बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही होने से संकरी जगहों पर यातायात प्रभावित हो रहा है। उच्च हिमालयी क्षेत्र में मौसम में अचानक बदलाव और भारी बर्फबारी जैसी परिस्थितियों के बीच वाहनों की बढ़ती संख्या ने यात्रा और यातायात प्रबंधन की चुनौती बढ़ा दी है।
