पुलिस के अनुसार, रुद्र 12 मार्च को घर से निकला था। उसने अपने पत्र में भावुक शब्दों में लिखा था: “मैं रुद्र पांडेय आ रहा हूं महाराज जी, आपके चरणों में। मैं अपने असली परिवार के पास जा रहा हूं। मम्मी-पापा मुझे ढूंढने की कोशिश मत करना। आपके साथ मेरा जीवन पूरा हो गया, अब मैं चलता हूं।”
छात्र ने पुलिस को बताया कि वह सोशल मीडिया पर संतों के प्रवचन और रील्स देखता था और उन्हीं से प्रभावित होकर आध्यात्मिक खोज में घर छोड़कर निकला। रुद्र ने अपने परिवार को पत्र में यह भी लिखा कि उसके जाने का कारण आध्यात्मिक मार्ग की तलाश है और वे उसे ढूंढने की कोशिश न करें।
रुद्र ने घर से निकलते समय लगभग ₹500 अपने साथ लिए थे। उसने पत्र में लिखा था कि पैसे उसके दोस्त के पास हैं और बाद में माता-पिता को लौटवा दिए जाएंगे। बेटे के अचानक गायब होने और पत्र मिलने से परिवार में हड़कंप मच गया। परिजनों ने तुरंत खजराना थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
तलाश के दौरान पुलिस को शक था कि रुद्र वृंदावन की ओर गया होगा। इसी बीच, किशोर ने अपने पिता को फोन किया और आधार कार्ड की जरूरत बताई, जिससे पुलिस को उसकी लोकेशन पता चली। इसके बाद इंदौर पुलिस ने उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग पुलिस की मदद से उसे गुप्तकाशी क्षेत्र से बरामद किया।
बरामदगी के बाद रुद्र को उसके माता-पिता को सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि किशोर पूरी तरह सुरक्षित है और अब उसे काउंसलिंग के माध्यम से समझाइश दी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन वीडियो किशोरों पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं। रुद्र के इस प्रकरण ने यह दिखाया कि माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों की मानसिक स्थिति और डिजिटल आदतों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
