नई दिल्ली: कीबोर्ड खरीदते समय अक्सर यह सवाल सामने आता है कि वायरलेस मॉडल लिया जाए या वायर वाला। दोनों से टाइपिंग का काम किया जा सकता है, लेकिन इनके इस्तेमाल का तरीका अलग होता है। वायरलेस कीबोर्ड में केबल की जरूरत नहीं होती, जबकि वायर्ड मॉडल को कंप्यूटर से सीधे जोड़कर इस्तेमाल किया जाता है। कौन सा कीबोर्ड आपके लिए उपयोगी रहेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप उसे कहां और किस काम के लिए इस्तेमाल करने वाले हैं। वायरलेस कीबोर्ड आमतौर पर ब्लूटूथ या छोटे USB रिसीवर के जरिए कनेक्ट होता है।
इसे टेबल पर सुविधा के अनुसार रखा जा सकता है और लैपटॉप से थोड़ी दूरी पर बैठकर भी टाइपिंग की जा सकती है। कुछ मॉडल एक से अधिक डिवाइस से जुड़ते हैं, जिससे कंप्यूटर और टैबलेट के बीच स्विच करना आसान हो सकता है। हालांकि खरीदने से पहले यह देखना जरूरी है कि आपका डिवाइस संबंधित कनेक्शन को सपोर्ट करता है या नहीं।
वायरलेस कीबोर्ड की एक बड़ी सुविधा यह है कि टेबल पर केबल कम रहती हैं। लैपटॉप को दूसरी जगह रखकर काम करना हो या स्क्रीन से दूर बैठकर टाइप करना हो, तो इसका इस्तेमाल सुविधाजनक हो सकता है। टीवी से जुड़े कंप्यूटर या छोटे डेस्क सेटअप में भी वायरलेस कीबोर्ड उपयोगी रहता है। इस्तेमाल के बाद इसे आसानी से हटाकर रखा जा सकता है। हालांकि इसमें बैटरी या चार्जिंग की जरूरत होती है।
बैटरी खत्म होने पर काम बीच में रुक सकता है। कुछ मॉडल में बैटरी बदलनी पड़ती है, जबकि कुछ को केबल से चार्ज किया जाता है। USB रिसीवर वाले मॉडल में रिसीवर छोटा होने के कारण उसके खोने की परेशानी भी हो सकती है। ब्लूटूथ मॉडल में रिसीवर की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन डिवाइस के साथ पेयरिंग करनी होती है।
वायर वाला कीबोर्ड USB केबल के जरिए कंप्यूटर से जुड़ता है और आमतौर पर प्लग इन करने के बाद इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें बैटरी चार्ज रखने की चिंता नहीं रहती और कनेक्शन सीधे तौर पर बना रहता है। टाइपिंग या गेमिंग के दौरान इनपुट तुरंत पहुंचना जरूरी हो तो कई लोग वायर्ड मॉडल का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि मौजूदा वायरलेस कीबोर्ड भी तेज होते हैं।
वायर्ड कीबोर्ड की मुख्य कमी इसकी केबल है। डेस्क पर तार फैला रह सकता है और कीबोर्ड को अपनी पसंद की जगह पर रखने की सुविधा सीमित हो सकती है। अगर लैपटॉप को बार-बार दूसरी जगह ले जाना पड़ता है, तो हर बार केबल निकालना और लगाना कुछ लोगों के लिए असुविधाजनक हो सकता है। वहीं डेस्कटॉप कंप्यूटर एक ही जगह रखा हो और कीबोर्ड भी वहीं इस्तेमाल किया जाता हो, तो केबल बड़ी परेशानी नहीं बनती।
गेमिंग, ऑफिस के काम और सामान्य टाइपिंग के लिए कीबोर्ड का चुनाव जरूरत के अनुसार किया जा सकता है। तेज प्रोसेस और सीधा कनेक्शन जरूरी हो तो वायर्ड मॉडल पर विचार किया जा सकता है, जबकि डेस्क को व्यवस्थित रखना, दूरी से टाइप करना या कई डिवाइस के बीच स्विच करना जरूरी हो तो वायरलेस मॉडल उपयोगी हो सकता है। गेमिंग के लिए वायरलेस कीबोर्ड लेते समय उसकी प्रोसेस और कनेक्शन से जुड़ी जानकारी जरूर जांचनी चाहिए। खरीदने से पहले कीबोर्ड का आकार, बटन की बनावट और बैटरी की जानकारी भी देखना जरूरी है।
वायरलेस मॉडल में यह जांचें कि वह ब्लूटूथ से जुड़ता है या USB रिसीवर से और लैपटॉप में जरूरी पोर्ट मौजूद है या नहीं। वायर्ड मॉडल के लिए केबल की लंबाई देख लें। रोज कई घंटे टाइपिंग करने वालों के लिए बटन दबाने का अनुभव भी महत्वपूर्ण हो सकता है। आखिर में दोनों में से किसी एक को हर व्यक्ति के लिए बेहतर नहीं कहा जा सकता। जरूरत, डिवाइस और इस्तेमाल के तरीके के आधार पर चुनाव किया जा सकता है।
