इस साल की शुरुआत में ईरान संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में बढ़ोतरी का असर उपभोक्ताओं पर डालने वाली नायरा एनर्जी पहली ईंधन खुदरा कंपनी थी। कंपनी ने 26 मार्च को पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद सार्वजनिक क्षेत्र की ईंधन खुदरा कंपनियों ने मई में पेट्रोल पंपों पर कीमतें बढ़ाना शुरू किया था। हालांकि, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद नायरा ने मार्च की बढ़ोतरी वापस ले ली थी। कंपनी ने 1 जुलाई को पेट्रोल के दाम 5 रुपये और डीजल के दाम 3 रुपये प्रति लीटर घटा दिए थे।
इसी बीच पेट्रोल और डीजल की बिक्री की सीमा को लेकर भी चर्चा चल रही है। सरकार ने ईंधन की बिक्री पर किसी भी तरह की सीमा लगाए जाने पर ऐतराज जताया है। पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने हाल ही में डीजल की बिक्री सीमित किए जाने की खबरों पर कहा था कि किसी को भी पेट्रोल-डीजल की बिक्री सीमित करने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा था कि इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता और इस मामले में सरकार के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। यह बयान ऐसे समय आया, जब जियो-बीपी और नायरा एनर्जी ने अपने कुछ पेट्रोल पंपों पर डीजल की खरीद सीमित कर दी थी।
डीजल की खुदरा और थोक कीमतों के बीच अंतर बढ़ने के कारण कारखानों, दूरसंचार कंपनियों, होटल, अस्पताल और अन्य बड़े उपभोक्ता खुदरा पंपों से अपेक्षाकृत सस्ता डीजल खरीदने लगे हैं। डीजल की खुदरा और थोक कीमतों में अंतर करीब 50 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। इसके चलते कुछ औद्योगिक उपभोक्ता एक बार में 400 से 600 लीटर तक डीजल खरीद रहे हैं। इससे कुछ पेट्रोल पंपों के भंडार पर दबाव बढ़ रहा है। पेट्रोल पंपों की भंडारण क्षमता सीमित होती है और दोबारा आपूर्ति में कुछ दिन लग सकते हैं।
इसी वजह से कुछ कंपनियों ने अपने पेट्रोल पंपों पर डीजल खरीद की सीमा तय की है। जियो-बीपी ने कुछ पंपों पर एक ग्राहक के लिए प्रतिदिन अधिकतम 50 लीटर डीजल खरीदने की सीमा लगाई है। वहीं नायरा एनर्जी के पेट्रोल पंपों पर यह सीमा 70 से 200 लीटर के बीच रखी गई है। ऐसे में नायरा एनर्जी की ओर से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए जाने के साथ ही ईंधन की बिक्री और उपलब्धता को लेकर भी स्थिति पर नजर बनी हुई है।
