MDR वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के बदले लिया जाता है और सामान्य तौर पर इसका भुगतान दुकानदार की ओर से किया जाता है। नए ढांचे के अनुसार 2,000 रुपये से अधिक के कुछ चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट यानी P2M UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन होगी। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और फ्यूल जैसे कुछ क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 5 रुपये का फ्लैट चार्ज लगेगा। वहीं म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर और डीलर से जुड़े भुगतान पर 0.02 प्रतिशत MDR निर्धारित किया गया है, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी।
इस व्यवस्था का आम ग्राहकों पर सीधा असर सीमित रखने की बात कही गई है। दोस्तों या रिश्तेदारों को भेजे जाने वाले P2P भुगतान पर कोई MDR नहीं लगेगा। दुकानों पर 2,000 रुपये तक के भुगतान भी इस दायरे से बाहर रहेंगे। इसके अलावा जिन छोटे दुकानदारों को UPI QR के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक का भुगतान मिलता है, उनके लिए पहले की तरह जीरो MDR लागू रहेगा। सरकार के मुताबिक नए नियमों का असर करीब 4 प्रतिशत मर्चेंट लेनदेन पर पड़ेगा, जबकि लगभग 96 प्रतिशत P2M भुगतान पहले की तरह जारी रहेंगे। नियमों के मुताबिक दुकानदार MDR का शुल्क सीधे ग्राहक से नहीं वसूल सकते। हालांकि, दुकानदारों का कहना है कि यदि उन्हें यह खर्च खुद उठाना पड़ा तो उनके मार्जिन पर असर पड़ेगा और कुछ कारोबारी कीमतों या पेमेंट से जुड़े ऑफर में बदलाव कर सकते हैं।
मोबाइल दुकानदारों का कहना है कि इस कारोबार में पहले से ही मार्जिन काफी कम है। एसोसिएशन की ओर से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि महीने में 5 लाख से 30 लाख रुपये तक UPI के जरिए कारोबार करने वाले छोटे दुकानदारों पर हर महीने करीब 2,000 से 12,000 रुपये तक का अतिरिक्त खर्च आ सकता है। एसोसिएशन के अनुमान के मुताबिक देशभर के छोटे मोबाइल रिटेलर्स पर हर महीने करीब 40 करोड़ रुपये और सालाना लगभग 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। संगठन की मांग है कि UPI मर्चेंट पेमेंट पर जीरो MDR की व्यवस्था जारी रखी जाए।
इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इन चार्ज पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने केंद्र, भारतीय रिजर्व बैंक और अन्य पक्षों से जवाब मांगा है। संबंधित पक्षों को चार सप्ताह में हलफनामा दाखिल करना होगा। यह याचिका वकील अंजन दत्ता ने दायर की है। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमन ने अदालत में कहा कि 96 प्रतिशत लोग नए ढांचे से बाहर हैं। सुनवाई के दौरान पीठ ने इसे कानूनी से ज्यादा तकनीकी मामला बताया। ऐसे में 2 अक्टूबर को प्रस्तावित ‘नो UPI डे’ नए MDR चार्ज के खिलाफ मोबाइल दुकानदारों के विरोध का प्रमुख हिस्सा होगा।
