रेवंत रेड्डी ने अपने संबोधन में भगवान शिव और भगवान राम की आस्था को लेकर उत्तर और दक्षिण भारत के संदर्भ में भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में भगवान राम की पूजा अधिक होती है, जबकि दक्षिण भारत में भगवान शिव के प्रति आस्था मजबूत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजेपी ने भगवान राम को राजनीतिक भावना से जोड़ दिया है और उन्हें राजनीतिक प्रतीक बना लिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि बीजेपी के सार्वजनिक कार्यक्रमों में ‘जय श्री राम’ का नारा लगाया जाता है, लेकिन ‘हर हर महादेव’ का नारा क्यों नहीं लगाया जाता। इसी दौरान उन्होंने भगवान शिव को ‘गरीबों का भगवान’ और भगवान राम को ‘अमीरों का भगवान’ बताया।
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में गांधी परिवार और संघ परिवार को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने गांधी परिवार को देश के लिए बलिदान का प्रतीक बताया, जबकि संघ परिवार पर धर्म, जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर भारत को बांटने का आरोप लगाया। रेवंत रेड्डी ने कहा कि भगवान राम को बीजेपी ने राजनीतिक भावना से जोड़ दिया है। उन्होंने भगवान शिव को गरीबों का देवता बताते हुए कहा कि यही वजह है कि बीजेपी के कार्यक्रमों में ‘हर हर महादेव’ की जगह ‘जय श्री राम’ का नारा सुनाई देता है। उनके इस बयान के बाद धार्मिक प्रतीकों और राजनीति के संबंध को लेकर सियासी बहस तेज हो गई।
रेवंत रेड्डी की टिप्पणी पर बीजेपी की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई। बीजेपी के राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रभारी और राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री के बयान को मानसिक दिवालियापन बताया। बीजेपी और विश्व हिंदू परिषद ने मुख्यमंत्री की टिप्पणी की आलोचना की। उनका कहना है कि भगवान शिव और भगवान राम को अलग-अलग सामाजिक वर्गों से जोड़कर इस तरह की टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी रेवंत रेड्डी के बयान पर आपत्ति जताई और कहा कि मुख्यमंत्री को इस तरह की टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए।
इस पूरे विवाद के केंद्र में रेवंत रेड्डी की भगवान शिव, भगवान राम और बीजेपी की धार्मिक राजनीति को लेकर की गई टिप्पणियां हैं। मुख्यमंत्री ने ‘जय श्री राम’ और ‘हर हर महादेव’ के नारों का अंतर बताते हुए बीजेपी पर भगवान राम को राजनीतिक प्रतीक बनाने का आरोप लगाया। वहीं बीजेपी और विश्व हिंदू परिषद ने उनके बयान को लेकर कड़ा विरोध जताया और इसे मानसिक दिवालियापन बताया। इस बयान के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच धार्मिक प्रतीकों, राजनीतिक विचारधारा और उत्तर-दक्षिण भारत के संदर्भ में बयानबाजी तेज हो गई है।
