खड़गे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने देश के पूर्वजों द्वारा बनाई गई मजबूत लोकतांत्रिक नींव को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया है। कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में उन्होंने कहा कि पूरा देश अब जानता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त का उद्देश्य भाजपा को लाभ पहुंचाना है। खड़गे ने ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि जिनके दबाव में मुख्य चुनाव आयुक्त ने कथित तौर पर ऐसा किया, प्रधानमंत्री मोदी को भी नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर पार्टी की चिंताओं को बैठक में रखा।
कांग्रेस अध्यक्ष ने मतदाता सूची से हटाए गए नामों को लेकर भी अपनी मांग सामने रखी। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, उन्हें इसकी पूरी जानकारी दी जानी चाहिए। साथ ही प्रभावित लोगों को अपना पक्ष रखने और अपील करने का अवसर भी मिलना चाहिए। खड़गे ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा और फैसलों में पारदर्शिता की मांग की। उनका कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव से जुड़े निर्णयों के संबंध में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता बनी रहे।
खड़गे ने कहा कि देश के लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की जिम्मेदारी एक बार फिर कांग्रेस के कंधों पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने पिछले 12 वर्षों के दौरान देश की मजबूत लोकतांत्रिक नींव को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया है। उनके अनुसार, चुनावी प्रक्रिया और संस्थाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर चर्चा की गई।
मंगलवार की बैठक में खड़गे के बयानों के केंद्र में चुनाव आयोग की भूमिका, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया और चुनावी फैसलों में पारदर्शिता के मुद्दे रहे। खड़गे ने अपने आरोपों के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई और प्रधानमंत्री मोदी से भी नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा जरूरी है।
