जांच के दौरान पुलिस को दीपक के कमरे से इलेक्ट्रिक ग्राइंडर, मोबाइल फोन, डायरी और अन्य सामान मिला है। इन वस्तुओं को कब्जे में लेकर जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद मौत से जुड़ी परिस्थितियों को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
दीपक मध्य प्रदेश के जबलपुर के गौर इलाके के परसवाड़ा गांव का रहने वाला था। परिवार के अनुसार, वह पढ़ाई में काफी तेज था और पढ़-लिखकर नौकरी करना चाहता था। उसके रिश्तेदार बृजेश कुमार पटेल ने बताया कि दीपक स्वभाव से सीधा-सादा था और उसका अधिकांश ध्यान पढ़ाई पर रहता था। वह अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए नौकरी की तैयारी कर रहा था।
परिवार के मुताबिक, कॉलेज के दौरान दीपक की धार्मिक रुचि बढ़ने लगी। इसके बाद उसने भक्ति का मार्ग अपना लिया। नर्मदा परिक्रमा करने के बाद वह वृंदावन पहुंचा और प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़ गया। यहीं से उसे रसिक दुलारी शरण के नाम से भी जाना जाने लगा।
परिजनों ने बताया कि दीपक वर्ष 2024 में आश्रम से जुड़ा था। इसके बाद उसका परिवार से संपर्क लगातार कम होता गया। एक बार वृंदावन से जबलपुर लौटने के बाद वह दोबारा वहां गया और करीब दो साल से घर नहीं आया था। परिवार का कहना है कि आश्रम में रहने के दौरान उसका संपर्क उनसे लगभग पूरी तरह खत्म हो गया था।
दीपक के बहनोई सोनू पटेल ने भी बताया था कि वह परिवार में सबसे अच्छा लड़का था। उनके मुताबिक, आश्रम से जुड़ने के बाद दीपक के पास मोबाइल भी नहीं रहता था, इसलिए परिवार के लोग उससे बातचीत नहीं कर पाते थे। परिजनों का आरोप है कि वे आश्रम के बाहर घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें दीपक से मिलने का मौका नहीं मिला।
दीपक की मौत की जानकारी मिलने के बाद परिवार के सदस्य वृंदावन पहुंचे। परिजनों का कहना है कि वे उसकी मौत की परिस्थितियों को लेकर संतुष्ट नहीं हैं। उनका दावा है कि मौत से जुड़े कई सवालों का जवाब जांच के बाद ही मिल सकेगा।
मामले में सामने आए सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस आत्महत्या के पहलू की जांच कर रही है। हालांकि, परिवार इस निष्कर्ष को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग की है।
पुलिस ने मौके से मिले मोबाइल, डायरी, इलेक्ट्रिक ग्राइंडर और अन्य सामान को जांच का हिस्सा बनाया है। अब फोरेंसिक जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मौत की परिस्थितियों की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।
