विश्व पर्यटन दिवस :- विशेष
विश्व पर्यटन दिवस प्रत्येक वर्ष 27 सितंबर को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य पर्यटन की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक भूमिका को उजागर करना है। 2026 का विषय “डिजिटल एजेंडा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से पर्यटन को पुनर्परिभाषित करना” है। इस विषय का फोकस बताता है कि आज यात्री अपनी यात्रा की योजना डिजिटल प्लेटफॉर्म और एआई टूल से बना रहे हैं – वे पूछते हैं “कहाँ रुकना है, क्या देखना है, और कहाँ-कहाँ जाना है” इसलिए अब यह सवाल उठता है कि इस बदलाव का लाभ किसे मिल रहा है और निर्णय कौन ले रहा है। विश्व पर्यटन दिवस का संदेश है कि तकनीक को सकारात्मक तरीके से उपयोग किया जाए, ताकि पर्यटन उद्योग अनावश्यक चुनिंदा गंतव्यों तक सीमित न रहे और इसकी पहुँच सब तक हो।
यात्री पहले से ही स्मार्टफोन ऐप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सहारे यात्रा की योजना बना रहे हैं। उदाहरण के लिए, अब पर्यटन सूचना-पोर्टल, वॉयस असिस्टेंट एवं चैटबॉट्स पर्यटकों को तत्काल सुझाव देने लगे हैं। आधुनिक एआई सिस्टम पर्यटक की प्राथमिकताओं, बजट और समय को ध्यान में रखकर व्यक्तिगत यात्रा कार्यक्रम बना सकते हैं। इन तकनीकों से ऐसा मार्गदर्शन मिल सकता है कि पर्यटन धरोहर स्थल केवल पर्यटक ट्रैफ़िक द्वारा निर्धारित न हों, बल्कि स्थानीय गंतव्य भी सामने आएं।
भारत में पर्यटन उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में एक आधारभूत स्तंभ है। हाल की सरकार ने तकनीक-आधारित नए कदम उठाए हैं। उदाहरण स्वरूप जून 2026 में पर्यटन मंत्रालय ने गूगल इंडिया के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस सहयोग का उद्देश्य भारत के पर्यटन स्थलों का डिजिटल प्रचार करना है। गूगल की विशेषज्ञता के ज़रिए दुनिया भर के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भारत के ऐतिहासिक स्थल, संस्कृति और अनुभवों की दृश्यता बढ़ाई जाएगी।
अतः एआई तथा एआर और वीआर जैसी तकनीकों से महलों या किसी मंदिर के इतिहास को मोबाइल स्क्रीन पर जीवंत अनुभव की तरह दिखाया जा सकता है। इस पहल के तहत गूगल की ग्लोबल ट्रैवल ट्रेंड्स और डिजिटल एंगेजमेंट डेटा का उपयोग कर बौद्धिक रूप से योजनाएं बनाई जा सकती हैं, जिससे पर्यटन के संदेश तेज़ी से लक्षित दर्शकों तक पहुंचे।
भारत विविध गंतव्यों से भरा है – हिमालय से लेकर समुद्र तट, विरासत स्थलों से लेकर राष्ट्रीय उद्यानों तक। डिजिटल टेक्नोलॉजी इन सभी को नए तरीके से प्रस्तुत कर सकती है।
उदाहरण के लिए, विश्व धरोहर सूची में शामिल आगरा के ताज महल जैसे धरोहरों के लिए वर्चुअल टूर या एआर गाइड विकसित किए जा सकते हैं, जिससे दूर बैठे पर्यटक भी इन स्थलों का पूर्वावलोकन ले सकें। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए बहुभाषी मोबाइल ऐप, वेबसाइट और क्यूआर कोड के माध्यम से ऐतिहासिक सूचना उपलब्ध कराई जा सकती है।
भारत के ग्रामीण क्षेत्र और जनजातीय इलाके भी पर्यटन के लिए समृद्ध हैं। यहां ग्रामीण होमस्टे, हस्तशिल्प, लोक कला और स्थानीय व्यंजन की पेशकश पर्यटन का अनूठा अनुभव हो सकता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म स्थानीय उद्यमियों और पर्यटकों को जोड़ने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। उदाहरणस्वरूप डिजिटल मार्केटप्लेस और सोशल मीडिया पर स्थानीय कला एवं भोजन को प्रोमोट किया जा सकता है। यह कदम सीधे-सीधे गांवों की आजीविका बढ़ाएगा। साथ ही महिला और युवा उद्यमियों को डिजिटल कौशल प्रशिक्षण देकर वे पर्यटन सेवाओं में नए कारोबार शुरू कर सकते हैं।
हालांकि तकनीक ने सुविधाएँ बढ़ाई हैं, किन्तु चुनौतियाँ भी हैं। डेटा गोपनीयता, साइबर सुरक्षा, और गलत जानकारी का प्रसार चिंता का विषय है। इसके अतिरिक्त अगर डिजिटल प्लेटफॉर्म केवल कुछ लोकप्रिय गंतव्यों को ही दिखाएंगे, तो छोटे-छोटे महत्वपूर्ण स्थलों पर ध्यान नहीं जाएगा। इसलिए सही दिशा में तकनीक का प्रयोग आवश्यक है। संयुक्त राष्ट्र पर्यटन संगठन याद दिलाता है कि पर्यटन दायित्वपूर्ण, सतत और समावेशी होनी चाहिए। इसका अर्थ है पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत का सम्मान और समुदाय की भागीदारी बनाए रखना। पर्यटन में उच्च-तकनीक एवं उच्च-स्पर्श दोनों का संतुलन होना चाहिए जैसेकि तकनीक से प्रभावी सेवाएं संचालित हों, पर अनुभव में मानव स्पर्श और स्थानीय संवेदनाएँ रहें। संक्षेप में कहें तो भारत को डिजिटल युग में पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए जैसेकि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण, समुदाय आधारित मॉडल, सतत विकास, नियमों व नीतियों पर विशेष रूप से ध्यानाकर्षण की आवश्यकता है। विश्व पर्यटन दिवस हमें याद दिलाता है कि पर्यटन केवल यात्रियों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्कृति, प्रकृति और मानव संबंधों का संगम है। जैसा कि विश्व पर्यटन संगठन (यूएनडब्ल्यूटीओ) कहता है कि हमें तकनीक का उपयोग उत्तरदायी, सतत और सार्वभौमिक रूप से सुलभ पर्यटन के लिए करना चाहिए। यदि हम डिजिटल एजेंडा को स्थानीय संस्कृति, समुदाय की भागीदारी और सतत विकास के साथ जोड़ते हैं, तो भारत विश्व पर्यटन मानचित्र पर एक समावेशी और आधुनिक गंतव्य के रूप में और भी मजबूती से उभरेगा।

डॉ० सत्येन्द्र चौधरी
सहायक आचार्य – पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय
