मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों पर बाजार की नजर बनी हुई है। कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। ऐसे में अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़ा कोई नया घटनाक्रम बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकता है। यदि क्षेत्र में तनाव कम होने के संकेत मिलते हैं तो कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव के साथ भारतीय शेयर बाजार पर भी उसका असर दिखाई दे सकता है।
घरेलू मोर्चे पर अगले सप्ताह कई महत्वपूर्ण आंकड़े जारी होने हैं। इनमें ऑटो बिक्री के आंकड़े, जीएसटी से जुड़े आंकड़े, औद्योगिक और विनिर्माण उत्पादन, पीएमआई, राजकोषीय घाटा तथा विदेशी मुद्रा भंडार शामिल हैं। इन आंकड़ों से अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति और कारोबारी गतिविधियों को लेकर संकेत मिल सकते हैं।
अगले कारोबारी सप्ताह में गांधी जयंती के कारण बाजार में केवल चार सत्रों में कारोबार होगा। छुट्टी के चलते सप्ताह सामान्य कारोबारी सप्ताह की तुलना में छोटा रहेगा। ऐसे में उपलब्ध कारोबारी सत्रों के दौरान वैश्विक घटनाक्रम और घरेलू आंकड़ों पर निवेशकों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण हो सकती है।
पिछले कारोबारी सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार दबाव में रहा। सेंसेक्स 399.22 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,895.74 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 205.90 अंक यानी 0.88 प्रतिशत कमजोर होकर 23,140.50 अंक पर रहा।
21 से 25 सितंबर के दौरान बड़े शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,285.25 अंक यानी 2.07 प्रतिशत गिरकर 60,906 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 160.45 अंक यानी 0.81 प्रतिशत की कमजोरी रही और यह 19,715.25 अंक पर बंद हुआ।
क्षेत्रीय प्रदर्शन की बात करें तो पिछले सप्ताह कुछ सेक्टरों में बढ़त रही। निफ्टी रियल्टी में 2.98 प्रतिशत, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 1.14 प्रतिशत, फार्मा में 1.10 प्रतिशत, एफएमसीजी में 1.04 प्रतिशत, इंडिया डिफेंस में 0.53 प्रतिशत और हेल्थकेयर में 0.39 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
दूसरी ओर आईटी क्षेत्र में 2.40 प्रतिशत की गिरावट रही। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 1.63 प्रतिशत, सर्विसेज 1.53 प्रतिशत, प्राइवेट बैंक 1.49 प्रतिशत, इंफ्रा 1.26 प्रतिशत और एनर्जी 0.88 प्रतिशत कमजोर रहे।
अब अगले सप्ताह बाजार की नजर वैश्विक तनाव, कच्चे तेल और घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। इन घटनाक्रमों के साथ चार कारोबारी सत्रों में होने वाली गतिविधियां शेयर बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी।
