भांडेर। दतिया जनपद के भांडेर नगर में डोल ग्यास पर भव्य जलविहार का आयोजन किया गया, आयोजन में नगर के अलग अलग मंदिरों से अलग अलग विमान की झाकियां निकालकर प्रभु को जल विहार के लिए ले जाया गया। जिसमें प्रमुख मंदिर इस प्रकार हैं।
श्रीचर्तुभुजराज सरकार : भांडेर के वार्ड 13 में स्थित मंदिर में भगवान विष्णु का मूंगा चट्टान से बना चार भुजाधारी स्वरूप विराजमान है। चतुर्भुज स्वरूप होने के कारण इन्हें श्रीचर्तुभुजराज सरकार के नाम से जाना जाता है। मंदिर के पुजारी रहे रमेश पंडा की जानकारी के अनुसार, उनके एक हाथ में शंख, दूसरे में चक्र, तीसरे में गदा और चौथा हाथ आशीर्वाद मुद्रा में है। छाती पर भृगु ऋषि के चरण प्रहार का निशान भी दिखता है। इसके अलावा पूरे शरीर पर अन्य विभिन्न चिह्न भी उभरे हुए हैं। इन सबसे प्रतीत होता है कि यह मूर्ति किसी इंसान द्वारा न बनाई जाकर स्वयंभू प्रतीत होती है।

इस मूर्ति के संदर्भ में कहा जाता है कि राजा जोगनाथ का शासन कभी भांडेर पर हुआ करता था और वे भगवान विष्णु के बड़े उपासक थे। उन्हें स्वप्न में समुद्र में इस मूर्ति के होने का आभास हुआ जो उनसे इसे बाहर निकालने को कह रही थी। स्वप्न के आधार पर राजा जोगनाथ गुजरात के पास समुद्र किनारे पहुंचे और देव कृपा से उन्हें समुद्र में से यह मूर्ति प्राप्त हुई। उसे लाकर उन्होंने यहां सोन तलैया पहाड़ी पर बने अपने किले में विराजमान किया। समय गुजरने के साथ, मुस्लिम आतंक से इस मूर्ति को बचाने किसी के द्वारा यहां स्थित कुंड, जिसे सोन तलैया कहा जाता है, में विसर्जित कर दिया गया।

कालांतर में आगे चलकर यह मूर्ति हजारी नामक एक मुस्लिम युवक को दिव्य स्वप्न के आधार पर हासिल हुई जिसे उन्होंने इस कुंड से कच्चे सूत के धागे से प्राप्त किया था। इस मूर्ति को तब वर्तमान जगह की बनिस्पत इसके आसपास कहीं और स्थापित किया गया था। बाद में वर्तमान जगह स्थित मंदिर में स्थापित किया गया। डोल ग्यारस को जलविहार दौरान विमान में इसी मूर्ति को रखा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि अपने जीवनकाल में जब तक हजारी इस मूर्ति को विमान में रखे जाने दौरान अपना हाथ नहीं लगाते थे, मूर्ति उठती नहीं थी।

उनकी मौत के बाद इस परंपरा को उनकी पत्नी ने बखूबी निभाया। लेकिन अपने जीवन के अंतिम काल में उन्होंने उनसे निवेदन किया कि अब उनका शरीर साथ नहीं देता। कोई संतान भी नहीं है जो आगे इस परंपरा को निभाए। लिहाजा अब हमारा इंतजार मत करना और जब जलविहार को ये लोग उठाएं तो जिद्द मत करना और उठ जाना। मान्यता है कि तभी से उनकी जिद्द और उनका यह चमत्कार विलुप्त हो गया। डोल ग्यारस को जलविहार हेतु निकले विमानों में श्रीचर्तुभुजराज सरकार का विमान सबसे आगे चलता है।

श्री बलदाऊ सरकार : यह बलराम जी का स्वरूप है और वर्तमान में चतुर्भुजराज सरकार मंदिर में श्रीचतुर्भुजराज सरकार के ठीक सामने कुछ दूरी पर विराजमान हैं। सफेद संगमरमर से बनी यह मूर्ति पहले यहां नहीं होती थी। वर्तमान मंदिर से कुछ दूर दूसरी जगह बने मंदिर में यह विराजमान थी। उस मंदिर के क्षतिग्रस्त स्थिति में पहुंचने पर लोगों ने सर्व सहमति से वहां विराजमान श्री बलदाऊ जी की मूर्ति को वर्तमान स्थान पर पुनर्स्थापित कराया। जलविहार दौरान श्रीचर्तुभुजराज सरकार के विमान के बाद दूसरे नंबर पर इनका विमान चलता है।

श्रीदूधाधारी सरकार : श्रीदूधाधारी सरकार का मंदिर नगर के वार्ड 15 के ठकुरास मोहल्ले में स्थित है जिसमें श्री राम – जानकी की सफेद संगमरमर से निर्मित मूर्तियां स्थापित हैं। यहां इन मूर्तियों में श्री राम के चेहरे पर मूंछें उत्कीर्ण हैं जो अपने आप में इस मूर्ति को विशिष्ट स्वरूप प्रदान करती हैं। इस मूर्ति के दूधाधारी नाम के पीछे का रोचक वाकया यह है कि इन्हें प्रतिदिन कच्चे और मिश्री युक्त मीठे दूध का भोग अनिवार्य रूप से लगाया जाता है और इसी कारण इनका नाम भी दूधाधारी पड़ा। लोग बताते हैं कि इन्हें दूध का भोग तो लगाया जाता था लेकिन वह फीका रहता था। एक बार मंदसौर के अपने एक भक्त को इन्होंने स्वप्न में यह बात बताई कि दूध का जो भोग लगता है वह फीका रहता है जो पीने में अच्छा नहीं लगता। यह बात स्वप्न में बताए भांडेर के पते पर संपर्क कर उनके उस भक्त ने कहा कि दूध का भोग लगा रहे हो वह फीका है जबकि उन्हें मीठा दूध चाहिए। तब से अब जो दूध रात्रि में भोग के लिए रखा जाता है। उसमें मिश्री अनिवार्य रूप से मिलाई जाती है।

श्री जानकीरमण सरकार : नगर के वार्ड 12 के बोहरान मोहल्ले में श्री जानकीरमण सरकार का स्टेट कालीन मंदिर स्थित है। यहां अष्टधातु निर्मित भगवान राम, माता जानकी और लक्ष्मण जी की मूर्ति स्थापित है। जलविहार के दौरान श्री दूधाधारी सरकार के विमान के पीछे यह विमान चलता है जिसमें भगवान राम, माता जानकी और लक्ष्मण जी शोभायमान रहते हैं।

श्रीराधा-गोविंद सरकार : भांडेर के वार्ड दो सिकंदरपुर में श्रीराधा-गोविंद सरकार का स्टेटकलीन मंदिर स्थित है। यहां अष्टधातु निर्मित श्री कृष्ण – राधा की मूर्तियां विराजमान रहती हैं। सुरेश राजौरिया के अनुसार, उनके पूर्वज बताते हैं कि मंदिर स्थापना के साथ जो मूर्तियां यहां विराजमान की गई थीं, वे चोरी हो गईं। वर्तमान मूर्तियां इसके बाद पुनर्स्थापित कराई गईं थीं। जलविहार के दौरान यह क्रम में पांचवां विमान होता है।
श्रीराघुवरकिशोर सरकार : भांडेर के वार्ड 9 में श्रीराघुवरकिशोर सरकार का बुन्देला शैली का भव्य मंदिर स्थित है। आशीष के अनुसार, यह झांसी स्टेटकलीन मंदिर दरअसल वैरागी संप्रदाय के नागाओं की गद्दी है। यहां श्रीराम और माता जानकी की अष्टधातु निर्मित मूर्तियां विराजमान हैं। जलविहार के दौरान निकले विमानों में श्रीराघुवरकिशोर सरकार का विमान छठवां और अंतिम होता है।
