अभिजीत दीपके के साथ आशुतोष रांका और सौरभ दास भी दिल्ली पहुंचने की तैयारी में जुटे हैं। नेताओं ने अपने पहले से तय कार्यक्रमों को रद्द करने की जानकारी दी है। दीपके ने एक पोस्ट में कहा कि वह महाराष्ट्र और गुजरात सीमा क्षेत्र में थे, लेकिन अब दिल्ली की उड़ान पकड़ने के लिए लौट रहे हैं। इसी संदेश में उन्होंने ज्ञानेश कुमार का भी उल्लेख किया।
इससे पहले दीपके ने चुनाव आयोग में सुधार की मांग को लेकर दिल्ली में जरूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस की जानकारी दी थी। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के नाम का उल्लेख करते हुए संकेत दिया था कि संगठन अब चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़े मुद्दों को अपने अभियान का हिस्सा बना सकता है।
आशुतोष रांका ने भी कहा था कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता से जुड़ी हालिया घटनाओं को देखते हुए उन्होंने अपने पहले से तय कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। उनके मुताबिक, संगठन के प्रमुख नेता तत्काल दिल्ली के लिए रवाना हो रहे हैं और वहां अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए अपनी बात रखेंगे।
पहले इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का समय दोपहर 12 बजे बताया गया था, लेकिन बाद में इसे दोपहर 2 बजे करने की जानकारी दी गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास के शामिल होने की बात कही गई है। संगठन ने इसके लिए लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखा है।
यह घटनाक्रम चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच सामने आया है। चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची की समीक्षा को लेकर कई राजनीतिक दलों ने सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ भी अलग-अलग आपत्तियां और मांगें सामने आई हैं। इन मुद्दों को लेकर न्यायिक हस्तक्षेप और चुनाव प्रक्रिया से संबंधित अन्य मांगों की चर्चा भी जारी है।
वहीं, चुनाव आयोग की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि एसआईआर समेत उसके फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए जाते हैं। आयोग के अनुसार, मतदाता सूचियों की विशेष गहन समीक्षा कोई नई प्रक्रिया नहीं है और पहले भी अलग-अलग समय पर ऐसी कवायद की जाती रही है। इस बार तकनीक के इस्तेमाल से प्रक्रिया को अधिक व्यापक और व्यवस्थित बनाने की बात कही गई है।
चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि निर्णय प्रक्रिया में अधिकारियों के बीच मतभेद या अलग-अलग विचार होना अपने आप में संस्थागत टकराव का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। आयोग के अनुसार अंतिम निर्णय सभी संबंधित अधिकारियों की सहमति से लिए जा रहे हैं।
ऐसे में अब दिल्ली में होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर नजर बनी हुई है। अभिजीत दीपके और संगठन के अन्य नेताओं के दिल्ली पहुंचने तथा ज्ञानेश कुमार का लगातार उल्लेख किए जाने से यह स्पष्ट है कि चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे उनके अगले सार्वजनिक अभियान में प्रमुखता से उठ सकते हैं। हालांकि प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन की ओर से कौन से ठोस कदम या नए कार्यक्रम घोषित किए जाएंगे, इसकी जानकारी आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।
