वाशिंगटन। अमेरिका में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी डीजल के निर्यात पर रोक लगाने के विचार का समर्थन किया है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका बड़ी मात्रा में डीजल का उत्पादन करता है और यदि इसका अधिक हिस्सा घरेलू बाजार में उपलब्ध कराया जाए तो ईंधन की बढ़ती कीमतों से अमेरिकी उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भी कहा है कि प्रशासन पूर्ण या आंशिक निर्यात प्रतिबंध की व्यवहार्यता का आकलन कर रहा है। हालांकि अभी इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
अमेरिका में 6.52 डॉलर प्रति गैलन पहुंचा डीजल
अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (AAA) के अनुसार 22 सितंबर को अमेरिका में डीजल की राष्ट्रीय औसत खुदरा कीमत 6.5276 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई। यह अब तक का रिकॉर्ड स्तर है। एक साल पहले यही कीमत 3.6880 डॉलर प्रति गैलन थी। यानी एक साल में डीजल की कीमत में करीब 77 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
डीजल की कीमत बढ़ने का असर केवल निजी वाहनों तक सीमित नहीं है। अमेरिका में ट्रक, कृषि मशीनरी, निर्माण उपकरण और माल ढुलाई में डीजल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। इसलिए ईंधन महंगा होने पर परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
ट्रंप ने क्या कहा?
संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने पहले भी अमेरिकी डीजल को विदेश भेजने के बजाय घरेलू बाजार में रखने की बात कही है। उनके मुताबिक इससे अमेरिकी बाजार में आपूर्ति बढ़ाई जा सकती है और डीजल के साथ पेट्रोल की कीमतों पर भी कुछ असर पड़ सकता है। बेसेंट ने कहा कि प्रशासन यह देख रहा है कि पूर्ण या आंशिक निर्यात रोक व्यावहारिक होगी या नहीं और इससे अमेरिकी रिफाइनरियों के संचालन पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
यह मुद्दा नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले भी महत्वपूर्ण हो गया है। कई रिपब्लिकन सांसद और चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए निर्यात प्रतिबंध की मांग कर रहे हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व संकट का असर
वैश्विक डीजल बाजार पहले से ही आपूर्ति दबाव का सामना कर रहा है। रूस की रिफाइनरियों पर यूक्रेनी ड्रोन हमलों, मध्य-पूर्व में संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल की उपलब्धता प्रभावित हुई है। रॉयटर्स के अनुसार रूस, मध्य-पूर्व और प्रमुख एशियाई आपूर्तिकर्ताओं से डीजल निर्यात जुलाई में पिछले साल की तुलना में करीब 13 लाख बैरल प्रतिदिन कम रहा।
ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ बैठक से पहले रूसी रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन हमलों से रूस को नुकसान हुआ है, लेकिन इसका असर डीजल की कीमतों पर भी पड़ रहा है।
अमेरिका निर्यात रोकता है तो वैश्विक बाजार पर क्या असर?
अमेरिका दुनिया के प्रमुख रिफाइंड ईंधन आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। अमेरिकी डीजल का एक बड़ा हिस्सा विदेशों में जाता है। ऐसे में यदि अमेरिका निर्यात पर पूर्ण या बड़ी आंशिक रोक लगाता है तो घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ सकती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी ईंधन की कमी पैदा हो सकती है।
इसका असर खास तौर पर यूरोप पर पड़ सकता है, जहां रूस से ऊर्जा आयात पर प्रतिबंधों के बाद अमेरिकी ईंधन की भूमिका बढ़ी है। वैश्विक बाजार पहले से ही तंग है, इसलिए अमेरिकी निर्यात घटने पर अन्य क्षेत्रों में डीजल की कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बन सकता है।
हालांकि निर्यात रोकने से अमेरिकी घरेलू कीमतों में कितनी कमी आएगी, यह भी निश्चित नहीं है। रिफाइनरियां घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के बीच कीमतों के अंतर के आधार पर उत्पादन और बिक्री के फैसले लेती हैं। लंबे समय में निर्यात पर रोक का असर उत्पादन, रिफाइनिंग मार्जिन और आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
पेट्रोल की कीमतों पर असर कितना?
ट्रंप ने संकेत दिया है कि डीजल को घरेलू बाजार में रखने से पेट्रोल की कीमतों पर भी कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि डीजल और पेट्रोल के बाजार अलग-अलग हैं और दोनों की कीमतों पर कच्चे तेल की कीमत, रिफाइनिंग क्षमता, क्षेत्रीय मांग तथा वैश्विक आपूर्ति जैसे कई कारकों का असर पड़ता है। इसलिए केवल डीजल निर्यात रोकने से पेट्रोल की कीमत कितनी घटेगी, इसका अभी कोई निश्चित अनुमान नहीं है।
भारत पर भी पड़ सकता है अप्रत्यक्ष असर
अमेरिकी डीजल निर्यात पर रोक का भारत पर सीधा असर इस बात पर निर्भर करेगा कि इससे वैश्विक ईंधन बाजार में आपूर्ति कितनी प्रभावित होती है। यदि अमेरिकी निर्यात में बड़ी कमी आती है और अन्य उत्पादक इसकी भरपाई नहीं कर पाते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय डीजल और कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आयात बिल और परिवहन लागत पर असर पड़ सकता है। हालांकि भारत पर वास्तविक प्रभाव कच्चे तेल की कीमत, रुपये की विनिमय दर, घरेलू ईंधन मूल्य नीति और दुनिया भर में उपलब्ध वैकल्पिक आपूर्ति पर निर्भर करेगा।
फिलहाल अंतिम फैसला नहीं
ट्रंप के समर्थन के बावजूद अमेरिकी प्रशासन ने डीजल निर्यात पर रोक लगाने का अंतिम फैसला नहीं किया है। सरकार पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध के संभावित लाभ और अमेरिकी रिफाइनिंग उद्योग तथा वैश्विक ईंधन बाजार पर उसके प्रभाव का आकलन कर रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रशासन का फैसला अमेरिका के साथ-साथ वैश्विक डीजल बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण रहेगा।
