ट्रंप के मुताबिक भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव जिस स्तर तक पहुंच गया था उससे हालात और गंभीर हो सकते थे। उन्होंने अपने संबोधन में इस पूरे घटनाक्रम को अपने उन प्रयासों से जोड़कर पेश किया जिनके जरिए वह विभिन्न देशों के बीच संघर्ष को रोकने का दावा करते रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उन्हें युद्ध रोकने और बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाने के लिए धन्यवाद दिया था। हालांकि 3 करोड़ लोगों की जान बचाने का आंकड़ा ट्रंप द्वारा किया गया दावा है और इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं बताया गया है।
भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में तनाव उस समय बढ़ा था जब पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव की स्थिति बनी और कई दिनों तक तनाव जारी रहा। बाद में दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम हुआ। ट्रंप लंबे समय से इस घटनाक्रम को अपनी कूटनीतिक भूमिका से जोड़ते रहे हैं और अब संयुक्त राष्ट्र के मंच से उन्होंने एक बार फिर इसी दावे को दोहराया है।
हालांकि इस घटनाक्रम को लेकर भारत का पक्ष ट्रंप के दावे से अलग रहा है। भारत ने लगातार कहा है कि सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला दोनों देशों के बीच सीधे संपर्क और आपसी समझ के तहत हुआ था। भारत तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के दावे को स्वीकार नहीं करता। भारत की विदेश नीति में भारत पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय तरीके से मुद्दों को सुलझाने की बात लंबे समय से कही जाती रही है। इसलिए ट्रंप के दावे और भारत के आधिकारिक रुख के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।
पाकिस्तान की ओर से हालांकि ट्रंप की भूमिका को लेकर सकारात्मक बयान सामने आते रहे हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पहले भी भारत के साथ हुए संघर्ष विराम में ट्रंप के हस्तक्षेप की सराहना की थी। पाकिस्तान की तरफ से ट्रंप को शांति स्थापित करने की कोशिशों के लिए धन्यवाद दिए जाने की बात ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में भी दोहराई।
संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र 22 सितंबर से शुरू हुआ है और इसमें दुनिया के विभिन्न देशों के नेता अंतरराष्ट्रीय शांति सुरक्षा और वैश्विक चुनौतियों पर अपने विचार रख रहे हैं। ऐसे में ट्रंप का भारत पाकिस्तान संघर्ष को लेकर यह बयान एक बार फिर चर्चा में आ गया है। खास बात यह है कि ट्रंप ने इस दावे को अपने व्यापक शांति प्रयासों के हिस्से के तौर पर पेश किया जबकि भारत की ओर से संघर्ष विराम में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की भूमिका को स्वीकार नहीं किया गया है।
