चार अलग क्षेत्रों की मांग का किया जिक्र
अंबेडकरनगर में बातचीत के दौरान राजभर ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और इसकी विशाल आबादी को देखते हुए भविष्य में इसका पुनर्गठन होना तय है। उन्होंने बुंदेलखंड में अलग राज्य की मांग, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हरित प्रदेश की मांग के साथ मध्यांचल और पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की मांग का भी उल्लेख किया।
राजभर के मुताबिक, पूर्वांचल के छह मंडलों में राजभर समाज की बड़ी आबादी है। उनका कहना है कि यदि पूर्वांचल को अलग राज्य का दर्जा मिलता है तो वहां के राजनीतिक समीकरणों में राजभर समाज की भूमिका महत्वपूर्ण होगी और गठबंधन की स्थिति में मुख्यमंत्री पद पर समाज की दावेदारी मजबूत रहेगी।
सपा पर माफिया संरक्षण का आरोप
राजभर ने समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। सपा के खिलाफ सामने आए उन पोस्टरों का जिक्र करते हुए, जिनमें अखिलेश यादव के साथ अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान की तस्वीरें दिखाई गई हैं, उन्होंने पोस्टरों में लगाए गए आरोपों का समर्थन किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के कार्यकाल में अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे अपराधियों को संरक्षण मिला। राजभर ने इसी आधार पर सपा सरकार की पहचान को अपराध और माफियाराज से जोड़ने का दावा किया। साथ ही उन्होंने सपा के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक के राजनीतिक नारे पर भी कटाक्ष किया।
अखिलेश-ओवैसी गठबंधन पर भी टिप्पणी
असदुद्दीन ओवैसी और अखिलेश यादव के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी राजभर ने अपनी राय रखी। उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव और राहुल गांधी खुद को मुस्लिम समाज का राजनीतिक नेतृत्व करने वाला मानते हैं, जबकि ओवैसी चाहते हैं कि मुस्लिम समाज से कोई नेता मुख्यमंत्री बने।
राजभर के मुताबिक, मुख्यमंत्री पद और राजनीतिक नेतृत्व को लेकर दोनों पक्षों की सोच अलग है, इसलिए अखिलेश यादव और ओवैसी के बीच गठबंधन होना मुश्किल है। यह राजभर का राजनीतिक आकलन है; ओवैसी की ओर से गठबंधन को लेकर हालिया बयान में 2 अक्टूबर तक इंतजार करने की बात सामने आई है।
पहले भी उठा है यूपी के पुनर्गठन का मुद्दा
उत्तर प्रदेश को अलग-अलग राज्यों में बांटने की मांग पहले भी राजनीतिक बहस का हिस्सा रही है। राजभर के ताजा बयान में चार हिस्सों के रूप में पूर्वांचल, मध्यांचल, बुंदेलखंड और पश्चिमी क्षेत्र की मांग का संदर्भ सामने आया है। हालांकि, फिलहाल उत्तर प्रदेश के चार राज्यों में विभाजन को लेकर कोई प्रशासनिक फैसला नहीं हुआ है। राजभर का बयान राजनीतिक मांग और भविष्य की संभावित स्थिति को लेकर उनका दावा है।
