मध्यपूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बाजार के लिए प्रमुख वैश्विक जोखिमों में बना हुआ है। इस क्षेत्र से जुड़ी किसी भी नई खबर का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है। खासकर कच्चे तेल की कीमतों में तेज बदलाव का असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
अमेरिकी टैरिफ से जुड़े घटनाक्रम भी भारतीय बाजार के लिए अहम रहेंगे। अमेरिका में रूस पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित एक विधेयक को प्रतिनिधि सभा से मंजूरी मिलने के बाद इस पर नजर बनी हुई है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है।
इस तरह के किसी कदम का प्रभाव भारत और चीन जैसे बड़े ऊर्जा आयातकों पर पड़ सकता है। इससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े समीकरण प्रभावित होने की आशंका भी बनी रहेगी। इसलिए निवेशक अमेरिकी व्यापार नीति और उससे जुड़े अगले कदमों को करीब से देखेंगे।
कच्चे तेल की कीमतें भारतीय शेयर बाजार के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण संकेतक रहेंगी। तेल की लागत में बढ़ोतरी से महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है और इससे आर्थिक विकास को लेकर चिंताएं भी पैदा हो सकती हैं। बीते सप्ताह बाजार की धारणा पर ऊर्जा लागत को लेकर ऐसी ही चिंताओं का असर दिखाई दिया।
विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। 18 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय नकद बाजार में शुद्ध खरीदार रहे और उन्होंने 599.54 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इसी दिन घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी 1,019.69 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की।
रुपये और अमेरिकी डॉलर की चाल पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव का असर कंपनियों की लागत, आयात और विदेशी निवेश के प्रवाह पर पड़ सकता है। इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बदलाव भी वैश्विक निवेश प्रवाह को प्रभावित करने वाला प्रमुख संकेतक बना रहेगा।
घरेलू मोर्चे पर पीएमआई और बुनियादी ढांचे से जुड़े आंकड़े अगले सप्ताह जारी होने हैं। इन आंकड़ों से देश की आर्थिक गतिविधियों की स्थिति का संकेत मिलेगा। निवेशक इन आंकड़ों को आर्थिक वृद्धि की गति और कारोबारी माहौल के आकलन के लिए देख सकते हैं।
भारतीय शेयर बाजार ने पिछला सप्ताह कमजोर स्तर पर समाप्त किया। सेंसेक्स 0.65 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,294.46 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.22 प्रतिशत फिसलकर 23,346.40 अंक पर रहा। ऐसे में अगले सप्ताह वैश्विक तनाव, तेल की कीमत, टैरिफ और घरेलू आंकड़ों के बीच बाजार की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
