भाजपा के लिए तावड़े का यह दौरा इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में पार्टी का प्रदर्शन 2019 के लोकसभा और 2022 के विधानसभा चुनाव की तुलना में कमजोर रहा था। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को दोबारा सक्रिय और मजबूत करने पर जोर है।
प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी संभालने के बाद तावड़े का यह पहला गोरखपुर क्षेत्र दौरा है। संगठनात्मक नजरिए से इसे भाजपा के लिए अहम क्षेत्र माना जाता है। इसकी एक वजह यह भी है कि भाजपा के सहयोगी दल निषाद पार्टी, अपना दल और सुभासपा का यहां खासा प्रभाव है। पिछले चुनाव में इन दलों के प्रत्याशी भी जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।
सहयोगी दलों की दावेदारी भी अहम
2027 के चुनाव में सहयोगी दल अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदारी कर रहे हैं। ऐसे में तावड़े के दो दिन के प्रवास में भाजपा की तैयारियों के साथ सहयोगी दलों की स्थिति और उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों का भी फीडबैक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीटों के तालमेल और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को लेकर संगठन स्तर पर जानकारी जुटाई जाएगी।
इस बार पार्टी में महिला नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से भी टिकट की दावेदारी सामने आ रही है। वहीं जेनजी आंदोलन के बाद युवाओं की भूमिका और उनकी राजनीतिक सक्रियता भी चर्चा में है। संगठन के हालिया विस्तार में इसका असर देखने को मिला है। पार्टी इन तमाम बदलावों को ध्यान में रखते हुए आगामी चुनाव की रणनीति तैयार करने में जुटी है।
तावड़े के दौरे में केवल संगठन की रिपोर्ट तक सीमित रहने के बजाय विधायकों और संभावित प्रत्याशियों के बारे में जमीनी फीडबैक को भी अहम माना जा रहा है। यही वजह है कि उनके दौरे को लेकर पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में सक्रियता बढ़ी है।
2022 में 62 में से 42 सीटें जीती थीं भाजपा
संगठनात्मक दृष्टि से गोरखपुर क्षेत्र में कुल 62 विधानसभा सीटें आती हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इनमें से 42 सीटों पर जीत दर्ज की थी। गोरखपुर मंडल में पार्टी की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत रही। मंडल की 28 सीटों में से 27 पर भाजपा और उसके सहयोगियों को जीत मिली थी। इसके मुकाबले बस्ती मंडल की 13 विधानसभा सीटों में भाजपा को छह सीटों पर जीत मिली थी। आजमगढ़ मंडल की 21 सीटों में पार्टी के पास केवल तीन सीटें हैं। इनमें दो बलिया और एक मऊ की सीट शामिल है।
लोकसभा चुनाव में भी क्षेत्रवार तस्वीर अलग रही
2024 के लोकसभा चुनाव में गोरखपुर-बस्ती मंडल की नौ लोकसभा सीटों में भाजपा ने छह पर जीत दर्ज की थी। वहीं आजमगढ़ मंडल की आजमगढ़ और लालगंज दोनों सीटों पर भाजपा को जीत नहीं मिली। दोनों सीटें समाजवादी पार्टी के खाते में गई थीं। ऐसे में 2027 का विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए इस क्षेत्र में संगठनात्मक स्थिति और चुनावी समीकरणों को नए सिरे से परखने का मौका भी माना जा रहा है।
सहयोगियों की राजनीतिक नजदीकी से बढ़ी चिंता
भाजपा के लिए अपना दल, निषाद पार्टी और अन्य सहयोगी दलों के साथ सीटों के बंटवारे तथा स्थानीय समीकरणों का तालमेल महत्वपूर्ण रहेगा। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी की ओर से सहयोगी दलों को अपने साथ जोड़ने की कोशिशें भी भाजपा के लिए रणनीतिक चुनौती का विषय हो सकती हैं।
पिछले दिनों निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के घर पहुंचे थे। दोनों नेताओं की इस मुलाकात के राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। ऐसे में तावड़े के दौरे के दौरान संगठन के साथ सहयोगी दलों से जुड़े समीकरणों पर भी भाजपा की नजर रहने की संभावना है।
