इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म में इसी गीत का इस्तेमाल काल्पनिक गैंगस्टरों और अपराधियों को दिखाने वाले सीन में किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे गीत के मूल भाव और सांस्कृतिक महत्व का गलत अर्थ निकल सकता है। उनका तर्क है कि एक ऐतिहासिक और राष्ट्रीय नायक को समर्पित गीत को अपराध और गैंग संस्कृति से जोड़कर दिखाना सही नहीं है।
‘सांस्कृतिक को पहुंच सकता है नुकसान’
याचिका में ये भी कहा गया है कि फिल्म में अपराधियों के सीन के साथ इस गाने का इस्तेमाल राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचा सकता है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, अगर ऐसे गीतों को उनके मूल संदर्भ से हटकर इस्तेमाल किया जाता है, तो लोगों के बीच ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को लेकर गलत मैसेज जाएगा।
PIL में अदालत से सिर्फ फिल्म के क्लाइमेक्स से गाना हटाने की मांग ही नहीं की गई है, बल्कि भविष्य के लिए भी कुछ दिशानिर्देश बनाने की अपील की गई है। इस याचिका में कहा गया है कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से अहम लोगों से जुड़े गानों और प्रतीकों का इस्तेमाल इस तरह न हो, जिससे उनका संबंध अपराध या गलत तरह की गतिविधियों से जुड़ता हुआ दिखाई दे।
राजेंद्र राठौड़ ने भी जताई थी आपत्ति
दिल्ली हाई कोर्ट में PIL दाखिल होने से एक दिन पहले राजस्थान के वरिष्ठ बीजेपी नेता राजेंद्र राठौड़ ने भी इस मुद्दे पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने ‘शूरवीर’ गीत को फिल्म से हटाने की मांग करते हुए सेंट्रल फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष को पत्र लिखा था। राठौड़ ने अपने पत्र को सोशल मीडिया पर भी शेयर किया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप को समर्पित इस गीत को फिल्म में गैंगस्टर और आपराधिक किरदारों के साथ जोड़कर दिखाना ठीक नहीं है।
‘शूरवीर और गैंगस्टर के मूल्यों में अंतर’
राठौड़ ने अपने लेटर में कहा कि शूरवीर और गैंगस्टर के कैरेक्टर और उनके मूल्यों में जमीन-आसमान का अंतर है। उनके मुताबिक वीरता, त्याग, स्वाभिमान और अपनी मातृभूमि के प्रति समर्पण जैसे मूल्यों को अपराध, हिंसा और गैंग संस्कृति से जोड़कर दिखाना गलत है। उन्होंने CBFC से मांग की कि फिल्म से ‘शूरवीर’ गाने को हटाया जाए और आगे किसी भी ऐतिहासिक महापुरुषों से जुड़े गानों, प्रतीकों और चीजों के ऐसे इस्तेमाल की अनुमति न दी जाए, जिससे लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचे।
अब अदालत के फैसले पर नजर
फिलहाल, ‘मिर्जापुर: द मूवी’ के ‘शूरवीर’ गाने को लेकर विवाद अदालत तक पहुंच चुका है। एक तरफ याचिकाकर्ता और बीजेपी नेता इसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं, वहीं इस पूरे मामले में अब दिल्ली हाई कोर्ट के रुख पर नजर रहेगी। फिल्म के क्लाइमेक्स से गाना हटेगा या नहीं, इस पर अंतिम फैसला अदालत के आदेश के बाद ही साफ होगा।
