अधिकारियों के मुताबिक मौके पर की गई प्रारंभिक जांच के आधार पर दूध की गुणवत्ता को लेकर जहां संदेह सामने आया वहां से नमूना सुरक्षित तरीके से लिया गया। अब इस सैंपल की प्रयोगशाला में जांच की जाएगी। भोपाल से रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दूध में वास्तव में किसी तरह की मिलावट या गुणवत्ता संबंधी कमी है या नहीं। अधिकारियों ने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
संयुक्त जांच टीम में नायब तहसीलदार हरिओम ठाकुर और खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुरेंद्र ठाकुर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल रहे। टीम ने डेयरियों में पहुंचकर दूध की गुणवत्ता की जांच करने के साथ वहां उपलब्ध अन्य दूध उत्पादों को भी देखा। अधिकारियों ने बताया कि जांच का उद्देश्य उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना और दूध तथा दूध से बने उत्पादों में किसी तरह की मिलावट की संभावना को सामने लाना है।
जांच के दौरान डेयरियों में मौजूद दूध उत्पादों की भी पड़ताल की गई। इनमें सुक्रोज की मात्रा की जांच भी शामिल रही। अधिकारियों ने मौके पर उपलब्ध उत्पादों से जुड़े जरूरी तथ्यों को दर्ज किया। इस तरह की जांच से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि उपभोक्ताओं को बेचे जा रहे दूध और अन्य उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।
खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान ज्यादातर दुकानों पर दूध तय मानकों के अनुसार मिला। हालांकि एक डेयरी से लिए गए सैंपल की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि केवल प्रारंभिक जांच के आधार पर किसी डेयरी के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। भोपाल से आने वाली प्रयोगशाला रिपोर्ट के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
दूध रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ा खाद्य पदार्थ है और बड़ी संख्या में लोग इसका सीधे सेवन करते हैं। ऐसे में इसकी गुणवत्ता को लेकर समय समय पर जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। देवास में हुई इस कार्रवाई के बाद अब लोगों की नजर भोपाल भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट पर है। यदि जांच में दूध मानकों के विपरीत पाया जाता है तो संबंधित डेयरी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल प्रशासन रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है और उसके आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
