अफगान पक्ष ने यह भी कहा कि उसकी जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के खिलाफ हिंसा या आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं होने दिया जाएगा। इस बयान के साथ तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के दावे को सीधे तौर पर खारिज कर दिया है। मसूद अजहर की कथित मौजूदगी को लेकर दोनों देशों के दावों में लंबे समय से अंतर रहा है।
अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि मसूद अजहर उनके देश में मौजूद नहीं है। तालिबान की ओर से पहले भी इस तरह का इनकार किया जा चुका है। सितंबर 2022 में तालिबान के एक प्रवक्ता ने मसूद अजहर के अफगानिस्तान में होने से जुड़ी खबरों को गलत बताया था।
अफगान पक्ष का कहना है कि पाकिस्तान ने भी मसूद अजहर के अफगानिस्तान में मौजूद होने की कोई पुख्ता आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है। इसके बावजूद पाकिस्तान लगातार यह दावा करता रहा है कि जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक अफगानिस्तान में छिपा हुआ है।
पाकिस्तान के मुताबिक मसूद अजहर मई 2019 में डूरंड रेखा पार करके अफगानिस्तान चला गया था। इसके बाद से वह अफगानिस्तान में छिपा हुआ है। हालांकि, अफगान सरकार इस दावे को स्वीकार नहीं करती है और अब विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने भी उसकी मौजूदगी से स्पष्ट रूप से इनकार किया है।
तालिबान ने अपने बयान में एक बार फिर यह रुख दोहराया कि अफगान जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के खिलाफ हिंसा या आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होने दिया जाएगा। इस बयान को पाकिस्तान के आरोपों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि मसूद अजहर का नाम लंबे समय से दोनों देशों के बीच सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों में सामने आता रहा है।
मसूद अजहर को लेकर यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान पर आतंकी संगठनों और उनके नेताओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव की चर्चा होती रही है। पाकिस्तान पहले वित्तीय कार्रवाई कार्यबल की निगरानी सूची में भी रह चुका है। उसे 2018 से 2022 के बीच इस सूची में रखा गया था।
उस अवधि में आतंकवाद के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों को रोकने और आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान की व्यवस्था पर चिंता जताई गई थी। निगरानी सूची से बाहर आने के लिए पाकिस्तान को कई कदम उठाने पड़े थे। इनमें जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों के खिलाफ कार्रवाई भी शामिल थी।
अब मसूद अजहर की कथित मौजूदगी को लेकर पाकिस्तान के दावे और तालिबान के इनकार ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। अफगानिस्तान ने जहां अजहर के अपने देश में होने से इनकार किया है, वहीं पाकिस्तान अपने पुराने दावे पर कायम रहा है।
