राज्य में कुल 309 नगरीय निकायों के चुनाव प्रस्तावित हैं। मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया है। साथ ही सीसीटीवी कैमरों के जरिए वेबकास्टिंग की व्यवस्था भी की गई है।
चार नगर निगमों में भी आज वोटिंग
पहले चरण में अलवर, भरतपुर, बीकानेर और भीलवाड़ा नगर निगमों के वार्डों में भी पार्षदों के चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। वहीं जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे बड़े शहरों के प्रमुख नगर निगमों में मतदान दूसरे चरण में कराया जाएगा।
हालांकि जयपुर जिले की चौमूं, बगरू, शाहपुरा, चाकसू समेत 18 अन्य नगरीय निकायों में पहले चरण में ही मतदान हो रहा है।
27 नगर परिषदों में मुकाबला
पहले चरण में नागौर, ब्यावर, कोटपूतली, चूरू, सुजानगढ़, धौलपुर, सवाई माधोपुर, शाहपुरा, चौमूं, फतेहपुर, झुंझुनूं, जालोर, बारां, बूंदी, झालावाड़, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, डीडवाना-कुचामन सिटी, करौली, भिवाड़ी, खैरथल-तिजारा, जैसलमेर और बाड़मेर समेत 27 नगर परिषदों के वार्डों में चुनाव हो रहे हैं।
इसके अलावा 131 नगर पालिकाओं के वार्डों में भी पार्षद पद के लिए मतदान कराया जा रहा है। इनमें केकड़ी, पीसांगन, सरवाड़, नसीराबाद, सावर, तांतोटी, जायल, मूंडवा, बासनी, कुचेरा, निवाई, पीपलू, देवली, उनियारा, दूनी, विजयनगर, मसूदा, बीगोद, पावटा-प्रागपुरा, विराटनगर, नारायणपुर, बानसूर, सूरतगढ़, श्रीविजयनगर, रायसिंहनगर, अनूपगढ़, घड़साना, नोहर, भादरा, संगरिया, टिब्बी, रावतसर, राजगढ़, रतननगर, छापर, भुसावर, रूपवास, राजाखेड़ा, मनियां, सैपऊ, बौंली और खंडार समेत कई निकाय शामिल हैं।
जयपुर जिले के बगरू, चाकसू, जोबनेर, किशनगढ़-रेनवाल, फुलेरा, सांभर, बस्सी, दूदू, जमवारामगढ़, कालाडेरा, कानोता, खेजरोली, मनोहरपुर, नारायणा, फागी और वाटिका नगर पालिकाओं में भी पहले चरण में मतदान हो रहा है।
BJP के सामने शहरी किला बचाने की चुनौती
इन चुनावों में सत्तारूढ़ भाजपा के लिए दांव बड़ा है। दिसंबर 2023 में भजनलाल शर्मा सरकार के सत्ता संभालने के बाद शहरी मतदाताओं के बीच यह सरकार की पहली बड़ी चुनावी परीक्षा है। ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के तहत कराए जा रहे इन चुनावों के नतीजों को राज्य सरकार के कामकाज और नीतियों के प्रति जनता की राय से जोड़कर भी देखा जाएगा।
राजस्थान के नगरीय निकायों में भाजपा को पारंपरिक रूप से मजबूत माना जाता है। बीकानेर, भीलवाड़ा, अलवर और भरतपुर जैसे शहरों में पार्टी के सामने अपने शहरी आधार को बनाए रखने की चुनौती है।
भाजपा ने इस बार बड़ी संख्या में पुराने पार्षदों के टिकट काटकर नए चेहरों को मैदान में उतारा है। इससे पार्टी के भीतर टिकट से नाराज नेताओं और निर्दलीय प्रत्याशियों के रूप में मैदान में उतरे बागियों को साधना संगठन के लिए चुनौती है। इसके साथ ही भितरघात रोकना भी अहम होगा।
कांग्रेस के लिए खोई जमीन वापस पाने का मौका
विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बाद कांग्रेस के लिए निकाय चुनाव शहरी इलाकों में अपना जनाधार मजबूत करने का अवसर हैं। प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में पार्टी ने स्थानीय मुद्दों को चुनावी अभियान का आधार बनाया है।
सफाई व्यवस्था, सड़क, बिजली और स्थानीय प्रशासन की कथित विफलताओं को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरने की कोशिश की है। ऐसे में नतीजे यह भी बताएंगे कि शहरी मतदाताओं के बीच कांग्रेस अपनी स्थिति कितनी मजबूत कर पाती है।
58 लाख युवा वोटरों पर नजर
इस चुनाव में युवा मतदाता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। 18 से 25 वर्ष की आयु के करीब 21.30 लाख मतदाता हैं, जबकि 26 से 35 वर्ष के बीच करीब 36.60 लाख वोटर हैं। यानी 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग में करीब 58 लाख मतदाता हैं।
वहीं 18 से 29 वर्ष के Gen-Z वोटरों की संख्या करीब 35 लाख बताई गई है। कुल मतदाताओं में उनकी हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी है। इसलिए राजनीतिक दलों के लिए युवा वोटरों को अपने पक्ष में करना खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पहले चरण के मतदान के बाद नतीजे 14 सितंबर को सामने आएंगे। इसके साथ ही यह भी साफ होगा कि ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के तहत हुए इस पहले प्रयोग में शहरी राजस्थान ने किस पार्टी के पक्ष में अपना भरोसा जताया।
