CGST की कार्रवाई जिम संचालक कुरैशी से जुड़े चूनाभट्टी कोहेफिजा बावड़िया कलां सिंधी कॉलोनी और जेके रोड स्थित प्रतिष्ठानों पर की गई। पांचों स्थानों पर एक साथ पहुंची टीम ने जिम के दस्तावेजों बिलिंग रिकॉर्ड और टैक्स से जुड़े अन्य दस्तावेजों की जांच की। कार्रवाई इतनी बड़ी थी कि इसके लिए करीब 30 अधिकारियों की टीम लगाई गई। यह कार्रवाई प्रधान आयुक्त CGST एन पदमश्री के निर्देश पर की गई जबकि एडिशनल कमिश्नर जी मनिगंडा स्वामी के नेतृत्व में जांच दल ने पांचों ठिकानों पर कार्रवाई को अंजाम दिया।
जांच में सितंबर 2025 के बाद लागू हुए जीएसटी नियमों से जुड़े प्रावधान भी सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार नियमों में बदलाव के बाद संबंधित संस्थाओं के लिए टैक्स क्रेडिट की व्यवस्था समाप्त कर दी गई थी। इसके बाद ऐसे प्रतिष्ठानों को 5 प्रतिशत जीएसटी जमा करना जरूरी था। जांच एजेंसी का आरोप है कि जिम संचालक की ओर से यह टैक्स जमा नहीं किया जा रहा था। इससे पहले ऐसे प्रतिष्ठानों पर 18 प्रतिशत जीएसटी का प्रावधान लागू था लेकिन नियमों में बदलाव के बाद टैक्स की दर में संशोधन किया गया।
CGST अधिकारियों के मुताबिक दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि जिम की ओर से ग्राहकों से ली जाने वाली राशि का रिकॉर्ड किस तरह रखा गया और टैक्स का भुगतान नियमों के अनुसार किया गया या नहीं। शुरुआती जांच में एक करोड़ रुपए से ज्यादा की टैक्स चोरी का मामला सामने आने के बाद अब विभाग सभी दस्तावेजों की गहन जांच कर रहा है। कार्रवाई पूरी होने के बाद टैक्स चोरी की वास्तविक राशि तय की जाएगी और नियमानुसार जिम संचालक से बकाया टैक्स की राशि जमा कराई जा सकती है।
बताया गया कि CGST की टीम ने कार्रवाई एक दिन पहले शुरू की थी लेकिन जांच पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद रात के समय जिम 365 डिग्री के प्रतिष्ठानों को सील कर दिया गया था। अगले दिन अधिकारी फिर से संबंधित ठिकानों पर पहुंचकर दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि टैक्स चोरी का वास्तविक आंकड़ा कितना है और इसमें किन स्तरों पर नियमों का उल्लंघन किया गया।
इधर भोपाल के अलावा राजगढ़ जिले के सारंगपुर में भी स्टेट जीएसटी विभाग ने बड़े किराना कारोबारियों के प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। टीम ने दुकानों की बिलिंग व्यवस्था बिक्री और जीएसटी अनुपालन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। विभाग के पहुंचने की सूचना मिलते ही कुछ दुकानदार दुकानें बंद कर चले गए जबकि कुछ प्रतिष्ठानों पर संचालक मौजूद नहीं मिले।
सारंगपुर में बिना बिल सामान बेचने और ग्राहकों से जीएसटी सहित राशि लेने के बावजूद बिल जारी नहीं करने की शिकायतों के आधार पर निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान कुछ प्रतिष्ठान अनरजिस्टर्ड भी मिले। अधिकारियों के अनुसार कुछ दुकानों का सालाना टर्नओवर 40 लाख रुपए से कम पाया गया है और ऐसे मामलों में जीएसटी नियमों के तहत पात्रता की जांच की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल किसी प्रतिष्ठान के अनरजिस्टर्ड मिलने पर तत्काल कार्रवाई तय नहीं होती। निरीक्षण के बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
