इसी क्रम में रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड और एशियन डेवलपमेंट बैंक के बीच महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इसके तहत नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की तीन प्रमुख परियोजनाओं के लिए ट्रांजेक्शन एडवाइजरी सर्विसेज उपलब्ध कराई जा रही हैं। खास बात यह है कि इन सलाहकारी सेवाओं के लिए एडीबी की ओर से कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है।
सरकार की योजना ऐसे व्यावसायिक मॉडल और लेनदेन ढांचे तैयार करने की है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश करना आसान हो और उनका संचालन लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बना रहे। इससे निजी और संस्थागत निवेशकों के लिए परियोजनाओं में भागीदारी की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद है।
ओंकारेश्वर में प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर परियोजना इस योजना का प्रमुख हिस्सा है। जलाशय की सतह पर सौर पैनल स्थापित कर बिजली उत्पादन करने वाली इस तकनीक के जरिए उपलब्ध जल क्षेत्र का उपयोग किया जाएगा। ओंकारेश्वर में 278 मेगावाट क्षमता के एक चरण के लिए परियोजना संबंधी समझौता किया गया है।
इसके अलावा ओंकारेश्वर में लगभग 300 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता विकसित करने के लिए जरूरी जलाशय क्षेत्र और आधारभूत ढांचा उपलब्ध बताया गया है। इस तरह कुल मिलाकर करीब 600 मेगावाट क्षमता वाले फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट की दिशा में तैयारी की जा रही है। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए सर्वेक्षण, प्री फिजिबिलिटी और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट से संबंधित अध्ययन भी किए जा चुके हैं।
नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन की प्रकृति को देखते हुए सरकार अब बिजली भंडारण को भी परियोजनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रही है। सौर ऊर्जा दिन के समय उपलब्ध रहती है, जबकि बिजली की मांग कई बार अलग-अलग समय पर बढ़ती है। ऐसे में ऊर्जा भंडारण प्रणाली उत्पादन और मांग के बीच संतुलन बनाने में उपयोगी हो सकती है।
ओंकारेश्वर की प्रस्तावित परियोजना में दो घंटे की को-लोकेटेड एनर्जी स्टोरेज सिस्टम व्यवस्था का प्रावधान रखा गया है। इससे सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली को जरूरत के समय इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ाने की योजना है। पीएम सूर्य सरोवर योजना के तहत ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता का प्रावधान भी बताया गया है।
राज्य सरकार का लक्ष्य केवल सौर बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाना नहीं है। सरकार नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को औद्योगिक निवेश, ग्रीन इन्वेस्टमेंट, रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से जोड़ना चाहती है। इसके लिए परियोजनाओं को वित्तीय और तकनीकी रूप से व्यवहारिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
मध्य प्रदेश में सौर ऊर्जा की उपलब्ध संभावनाओं, जलाशयों और विकसित हो रहे ऊर्जा ढांचे को देखते हुए सरकार आने वाले समय में इस क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावना तलाश रही है। एडीबी के साथ सहयोग और ओंकारेश्वर जैसी परियोजनाओं को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। ऊर्जा उत्पादन, भंडारण और निवेश को एक साथ आगे बढ़ाकर राज्य को ग्रीन और क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाने की कोशिश की जा रही है।
