जन्माष्टमी के दिन सुबह करीब 10 बजे आभूषणों को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के लॉकर से निकालने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए नगर निगम आयुक्त की ओर से गठित विशेष समिति बैंक पहुंचेगी। सुरक्षा व्यवस्था के बीच आभूषणों को मंदिर तक लाया जाएगा। मंदिर पहुंचने के बाद सभी गहनों की सफाई की जाएगी और इसके बाद इन्हें भगवान राधा-कृष्ण के श्रृंगार में शामिल किया जाएगा।
गोपाल मंदिर में रखे इन आभूषणों की खासियत सिर्फ उनकी कीमत नहीं बल्कि उनका ऐतिहासिक और कलात्मक महत्व भी है। भगवान श्रीकृष्ण के श्रृंगार में सोने का मुकुट शामिल किया जाता है जिसमें पुखराज माणिक और पन्ने जैसे कीमती रत्न जड़े हैं। वहीं राधारानी का करीब तीन तोला वजन का रत्नजड़ित मुकुट भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहता है।
इन आभूषणों में सबसे ज्यादा चर्चा सात लड़ियों वाले उस हार की होती है जिसमें 62 असली मोती और 55 पन्ने जड़े हुए हैं। इस हार की कीमत करीब 35 करोड़ रुपए आंकी गई है। इसके अलावा रत्नजड़ित मुकुट की कीमत करीब 25 करोड़ रुपए बताई जाती है। भगवान के श्रृंगार में शामिल सोने के मुकुट की कीमत भी करीब 1.25 करोड़ रुपए बताई गई है। अलग अलग आभूषणों में जड़े कीमती रत्न इस पूरे श्रृंगार को और भव्य बना देते हैं।
जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर की सजावट भी खास अंदाज में की जाएगी। गोपाल मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी से सजाने के साथ फूल बंगला और रंगोली तैयार की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए परिसर में एलईडी स्क्रीन भी लगाई जाएंगी। इन स्क्रीन के जरिए भगवान के दर्शन का लाइव प्रसारण किया जाएगा ताकि भीड़ के कारण सभी श्रद्धालुओं को गर्भगृह तक पहुंचने में परेशानी न हो।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। मंदिर में पुलिसकर्मियों की तैनाती रहेगी और सीसीटीवी कैमरों से पूरे परिसर पर नजर रखी जाएगी। श्रद्धालुओं के आने और जाने के लिए अलग अलग व्यवस्था रखने की तैयारी है ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और दर्शन व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
गोपाल मंदिर का इतिहास भी बेहद खास है। इस मंदिर का निर्माण सिंधिया राजवंश की महारानी बैजाबाई ने वर्ष 1843 में कराया था। सफेद संगमरमर से बने इस मंदिर की वास्तुकला में मराठा शैली के साथ यूरोपीय प्रभाव भी नजर आता है। मंदिर के गर्भगृह में चांदी से मढ़े दरवाजे इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं।
जन्माष्टमी पर जब इन दुर्लभ आभूषणों से राधा-कृष्ण का श्रृंगार होगा तो गोपाल मंदिर में राजसी परंपरा और धार्मिक आस्था का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। यही वजह है कि इस विशेष दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह है।
