30 अगस्त को जब लोग तबाही के चार दिन बाद अपने घरों और दुकानों के मलबे में जरूरी सामान तलाशने के लिए लौटे तो उन्हें एक बार फिर भागना पड़ा। अचानक बाढ़ का अलर्ट जारी हुआ और पूरे इलाके में अफरा तफरी मच गई। लोग सुरक्षित जगह की तलाश में ऊंचाई की ओर दौड़ने लगे। कुछ ही समय में पूरा कस्बा फिर से खाली हो गया। जिन लोगों ने अपने घरों में बचा हुआ सामान निकालने की उम्मीद में वापसी की थी उन्हें दोबारा अपनी जान बचाकर वहां से निकलना पड़ा। इस घटना ने लोगों के डर को और गहरा कर दिया है।
देवीघाट में करीब 20 हजार लोगों की आबादी बताई जाती है लेकिन बाढ़ के बाद यहां हजारों लोगों के सामने अपना भविष्य बचाने का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब 7 हजार लोगों की अब तक कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल सकी है। बाढ़ के तेज बहाव में कई परिवार बिछड़ गए हैं और लोग अपनों की तलाश में भटक रहे हैं। कई घर पूरी तरह मलबे में दब चुके हैं जबकि कई मकानों की सिर्फ दीवारें बची हैं। दुकानों में रखा सामान कीचड़ और पानी में खराब हो चुका है।
स्थानीय निवासी पवन नेगी बताते हैं कि इलाके में पहले भी बाढ़ आती रही है लेकिन इस बार जैसी तबाही उन्होंने कभी नहीं देखी। लोगों को उम्मीद थी कि पानी कुछ समय बाद उतर जाएगा और हालात सामान्य हो जाएंगे लेकिन इस बार बाढ़ ने घरों के साथ खेत और कारोबार भी तबाह कर दिए। अब प्रभावित परिवारों के सामने दोबारा जिंदगी शुरू करने की बड़ी चुनौती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इलाके को फिर से बसाने में कई साल लग सकते हैं।
बाढ़ ने केवल लोगों के घर ही नहीं छीने बल्कि उनकी रोजी रोटी का साधन भी खत्म कर दिया है। कई लोगों की दुकानें बह गईं और पशुधन तक बाढ़ की भेंट चढ़ गया। बच्चों की पढ़ाई और परिवार के भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। मेडिकल स्टूडेंट राधिका थापा भी अपने परिवार के साथ मलबे में कपड़े और जरूरी सामान तलाशती नजर आईं। उनका घर और दुकान दोनों बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं।
देवीघाट की नंदा थापा के मुताबिक अचानक लोगों की चीख सुनाई दी कि बाढ़ आ गई है। इसके बाद किसी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और हर कोई जान बचाने के लिए सुरक्षित जगह की ओर भागने लगा। अब वही लोग मलबे के बीच अपनी जिंदगी के बचे हुए निशान तलाश रहे हैं। नेपाल की इस त्रासदी ने साफ कर दिया है कि प्राकृतिक आपदा के कुछ मिनट भी इंसान की पूरी जिंदगी बदल सकते हैं। देवीघाट में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन लोगों ने अपना सब कुछ खो दिया है वे दोबारा अपनी जिंदगी कैसे शुरू करेंगे।
