उद्योग बंधु की बैठक में अफसरों को तय समयसीमा में निस्तारण के निर्देश, विश्वकर्मा श्रम सम्मान के लाभार्थियों को बांटी टूलकिट
झांसी। औद्योगिक विकास को जनपद के चहुंमुखी विकास की आधारशिला बताते हुए जिलाधिकारी गौरांग राठी ने अधिकारियों को उद्यमियों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निस्तारण करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि समस्याओं के निस्तारण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और तय समयसीमा में प्रकरण निस्तारित नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
कलेक्ट्रेट के नवीन सभागार में शनिवार को जिला उद्योग बंधु समिति एवं जनपद स्तरीय एमओयू क्रियान्वयन इकाई की बैठक हुई। डीएम ने उद्यमियों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
बैठक में डीएम ने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत पांच हलवाई लाभार्थियों को सांकेतिक रूप से टूलकिट वितरित कीं। उन्होंने लाभार्थियों को अपना रोजगार शुरू करने के लिए शुभकामनाएं दीं। उपायुक्त उद्योग मनीष चौधरी ने बताया कि करीब 100 लाभार्थियों को टूलकिट वितरित की जा चुकी हैं।
ग्रोथ सेंटर औद्योगिक क्षेत्र बिजौली में भूखंड संबंधी प्रकरण की समीक्षा के दौरान डीएम ने उद्यमी वेदांत अग्रवाल की समस्या का समाधान कराया। E-17 भूखंड पर किसानों के विरोध के बाद यूपीसीडा ने E-04 भूखंड आवंटित किया था। डीएम ने दूसरे आवंटित भूखंड पर बैंक गारंटी प्रस्तुत कर लीज डीड पंजीकरण कराने के निर्देश दिए।
बिजौली के आवासीय परिसर की मूलभूत समस्याओं के लिए मिले 10 करोड़ रुपये के बजट की भी समीक्षा हुई। डीएम ने डीपीआर स्वीकृत होने के बाद 15 सितंबर तक काम शुरू कराने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान में झांसी को प्रदेश में चौथी रैंक और सीएम डैशबोर्ड पर A+ श्रेणी मिली है। 2500 के लक्ष्य के सापेक्ष 2829 प्रेषण, 846 आवेदन स्वीकृत और 768 मामलों में वितरण किया जा चुका है। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना एवं ओडीओपी में भी जनपद के प्रदेश के टॉप-5 में रहने पर डीएम ने अधिकारियों की सराहना की। उन्होंने ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी @5.0 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए सभी विभागों को सहयोग के निर्देश दिए। साथ ही एमएसएमई इकाइयों द्वारा भू-गर्भ जल के अति दोहन पर प्रवर्तन कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
