एक दिन पहले जोयल को उत्तरी जिले रसुवा से अकेले एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया गया था। उसके पैर में फ्रैक्चर और चेहरे पर चोट के निशान बताए गए हैं। वहीं, 28 वर्षीय उसकी मां तमांग अपने दोनों लापता बेटों की तलाश में परेशान थीं।
तेज आवाज सुनकर स्कूल की ओर दौड़ी मां
बुधवार सुबह दोनों बच्चे स्कूल की गाड़ी से स्कूल गए थे। उस समय तमांग घर पर बुनाई का काम कर रही थीं। इसी दौरान उन्हें भूकंप जैसी तेज आवाज सुनाई दी। वह तुरंत बेटों के स्कूल की ओर निकल पड़ीं।
स्कूल उनके घर से सामान्य तौर पर 15 से 20 मिनट की ड्राइव की दूरी पर था, लेकिन वहां पहुंचने पर पूरा इलाका बदला हुआ नजर आया। स्कूल की इमारत तबाह हो चुकी थी और आसपास का मंजर पहचानना मुश्किल था।
पेड़ों पर चढ़कर बचाई जान
बाढ़ और मलबे के बीच जोयल किसी तरह जंगल की तरफ भाग गया और पेड़ों पर चढ़कर अपनी जान बचाई। बाद में उसे अकेले एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया गया। इलाज के दौरान शुक्रवार को उसकी मां से फोन पर बात कराई गई। रॉयटर्स के मुताबिक, मां ने फोन पर अपने बेटे से रोते हुए बात की।
जोयल और उसकी मां उन खुशकिस्मत लोगों में शामिल हैं, जो इस भीषण आपदा के बीच एक-दूसरे से दोबारा मिल सके।
587 लोगों की मौत, 1900 से ज्यादा लापता
नेपाल में बाढ़ के बाद हुई भारी तबाही में अब तक 587 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 1900 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस आपदा के बाद 290 भारतीय नागरिकों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है और उनकी तलाश जारी है।
